श्री अन्नपूर्णा जी की आरती: (Shri Annapurna Ji Ki Aarti) श्रद्धा से भरी दिव्य यात्रा!

Soma
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श्री अन्नपूर्णा जी की आरती: (Shri Annapurna Ji Ki Aarti) श्रद्धा से भरी दिव्य यात्रा!


श्री अन्नपूर्णा जी की आरती: (Shri Annapurna Ji Ki Aarti) श्रद्धा से भरी दिव्य यात्रा!

श्री अन्नपूर्णा जी की आरती (Shri Annapurna Ji Ki Aarti) एक अत्यंत महत्वपूर्ण धार्मिक काव्य है, जिसे खासतौर पर माँ अन्नपूर्णा की पूजा में गाया जाता है। माँ अन्नपूर्णा का संबंध भोजन और समृद्धि से जुड़ा हुआ है। हिन्दू धर्म में अन्नपूर्णा जी को “अन्न की देवी” के रूप में पूजा जाता है। वे जीवन के सभी कष्टों को समाप्त करने और हर तरह की समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति प्रदान करने वाली मानी जाती हैं।

Contents

श्री अन्नपूर्णा जी की महिमा

अन्नपूर्णा माँ की महिमा बड़ी अद्भुत है। वे पृथ्वी पर भोजन की आपूर्ति करने वाली देवी मानी जाती हैं। जिनके आशीर्वाद से कोई भी व्यक्ति भूखा नहीं रहता। वे केवल शरीर को पोषित करने वाला भोजन ही नहीं, बल्कि आध्यात्मिक आन्न भी प्रदान करती हैं, जो जीवन को आध्यात्मिक सुख और शांति से भर देता है। उनके आशीर्वाद से न केवल आंतरिक समृद्धि प्राप्त होती है, बल्कि व्यक्ति के हर कार्य में सफलता की प्राप्ति भी होती है।

अन्नपूर्णा जी की आरती का महत्व

अन्नपूर्णा जी की आरती का महत्व अत्यधिक है। यह आरती विशेष रूप से माँ के आशीर्वाद प्राप्ति के लिए गाई जाती है। यह आरती न केवल भक्ति का माध्यम है, बल्कि मनुष्य के जीवन में सुख, समृद्धि, और शांति लाने वाली है। जिन घरों में यह आरती नियमित रूप से गाई जाती है, वहाँ धन-धान्य की कमी नहीं होती। साथ ही, यह आरती एक प्रकार से भक्ति और आस्था का प्रतीक मानी जाती है।

श्री अन्नपूर्णा जी की आरती (Shri Annapurna Ji Ki Aarti)

श्री अन्नपूर्णा जी की आरती
(Shri Annapurna Ji Ki Aarti)


बारम्बार प्रणाम, मैया बारम्बार प्रणाम…


जो नहीं ध्यावे तुम्हें अम्बिके, कहां उसे विश्राम।
अन्नपूर्णा देवी नाम तिहारो, लेत होत सब काम॥ बारम्बार…


प्रलय युगान्तर और जन्मान्तर, कालान्तर तक नाम।
सुर सुरों की रचना करती, कहाँ कृष्ण कहाँ राम॥ बारम्बार…


चूमहि चरण चतुर चतुरानन, चारु चक्रधर श्याम।
चंद्रचूड़ चन्द्रानन चाकर, शोभा लखहि ललाम॥ बारम्बार…


देवि देव! दयनीय दशा में दया-दया तब नाम।
त्राहि-त्राहि शरणागत वत्सल शरण रूप तब धाम॥ बारम्बार…


श्रीं, ह्रीं श्रद्धा श्री ऐ विद्या श्री क्लीं कमला काम।
कांति, भ्रांतिमयी, कांति शांतिमयी, वर दे तू निष्काम॥ बारम्बार…

श्री अन्नपूर्णा जी की आरती: (Shri Annapurna Ji Ki Aarti) श्रद्धा से भरी दिव्य यात्रा!
श्री अन्नपूर्णा जी की आरती: (Shri Annapurna Ji Ki Aarti) श्रद्धा से भरी दिव्य यात्रा!

श्री अन्नपूर्णा जी की आरती (Shri Annapurna Ji Ki Aarti) के बोल

“जय अन्नपूर्णे सदा पालन कारी,
भूख न लगै पिया सब सुखकारी।
सागर मंथन से जो पाया खजाना,
माँ अन्नपूर्णा से सदा रहे दीवाना।”

यह आरती श्रद्धा और प्रेम से गाई जाती है, जिसमें माँ अन्नपूर्णा के अद्भुत आशीर्वाद और उनकी कृपा का वर्णन किया जाता है। आरती में भगवान के भव्य रूप और उनके समस्त आशीर्वादों का महात्म्य बताया जाता है। यहाँ ध्यान देने योग्य बात यह है कि इस आरती को शुद्ध श्रद्धा और भक्ति से गाया जाए, तभी यह फलदायी होती है।

अन्नपूर्णा जी की पूजा विधि

अन्नपूर्णा जी की पूजा करने की विशेष विधि होती है। सबसे पहले, शुद्धता और पवित्रता का ध्यान रखते हुए एक स्वच्छ स्थान पर देवी के चित्र या मूर्ति की स्थापना करें। फिर, दीपक जलाकर, अगरबत्तियां एवं फूल अर्पित करें। पूजा में विशेष रूप से खाना और फल चढ़ाए जाते हैं, क्योंकि अन्नपूर्णा माँ को भोजन की देवी माना जाता है। पूजा समाप्त होने के बाद, आरती का गायन करना अत्यंत लाभकारी होता है।

अन्नपूर्णा देवी का रूप और पूजा

अन्नपूर्णा देवी को शाक्ति की देवी के रूप में पूजा जाता है। उनका रूप अत्यंत दयालु और वात्सल्यपूर्ण होता है। उनकी पूजा से भूख, दरिद्रता, और कष्टों से मुक्ति मिलती है। उन्हें सर्वकल्याणकारी देवी माना जाता है, जिनकी कृपा से हर व्यक्ति की आध्यात्मिक उन्नति होती है।

माँ अन्नपूर्णा का रूप सदैव शांत और सौम्य होता है, जिसमें उनके हाथों में कटोरी और चम्मच होते हैं, जो यह दर्शाते हैं कि वे खाद्य पदार्थों का वितरण करती हैं। उनके भव्य स्वरूप में सभी दुखों का नाश और धन की बरसात होती है।

अन्नपूर्णा आरती के मानसिक और आध्यात्मिक लाभ

अन्नपूर्णा आरती को सुनने और गाने से मानसिक शांति प्राप्त होती है। यह आरती एक प्रकार का ध्यान है, जिसमें व्यक्ति अपने सारे विचारों को माँ के चरणों में समर्पित करता है। इसका असर व्यक्ति के मन-मस्तिष्क पर गहरा पड़ता है और वह मानसिक शांति और स्थिरता महसूस करता है।

इसके अलावा, यह आरती व्यक्ति के भीतर आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार करती है, जो उसके जीवन को सकारात्मक दिशा में मार्गदर्शन करती है। अन्नपूर्णा जी की पूजा से व्यक्ति में आत्मिक संतोष और भौतिक सुख की प्राप्ति होती है।

अन्नपूर्णा जी की आरती का गायन कैसे करें

अन्नपूर्णा आरती का गायन करते वक्त कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना चाहिए। सबसे पहले, आरती गायक को पूरी श्रद्धा और भक्ति से गानी चाहिए। इसके साथ ही, स्वर की मधुरता और संगीत का संतुलन भी महत्वपूर्ण है। आरती को गायन करते समय ध्यान रखें कि आपकी भावनाएं पूरी तरह से अन्नपूर्णा जी के प्रति समर्पित हो। साथ ही, यदि आरती घर में गाई जा रही है, तो परिवार के सभी सदस्य साथ मिलकर इसे गायें, इससे परिवार में एकता बनी रहती है।

अन्नपूर्णा आरती का आध्यात्मिक प्रभाव

अन्नपूर्णा जी की आरती का आध्यात्मिक प्रभाव व्यक्ति के जीवन में चमत्कारी होता है। यह न केवल शारीरिक स्वास्थ्य में सुधार करती है, बल्कि आध्यात्मिक उन्नति के रास्ते भी खोलती है। आरती का नियमित रूप से गायन आत्मा को शुद्ध करता है और जीवन को दुनिया और आत्मा दोनों के दृष्टिकोण से समृद्ध बनाता है।

इसके अतिरिक्त, यह आरती व्यक्ति को अपने कर्मों का विश्लेषण करने के लिए प्रेरित करती है और उसे सही मार्ग पर चलने के लिए उत्तेजित करती है।

श्री अन्नपूर्णा जी की आरती (Shri Annapurna Ji Ki Aarti) एक अत्यंत पवित्र और दिव्य पूजा विधि है, जो न केवल भौतिक सुख की प्राप्ति में सहायक है, बल्कि व्यक्ति के मानसिक और आध्यात्मिक स्वास्थ्य में भी सुधार लाती है। इस आरती के माध्यम से व्यक्ति अपनी आध्यात्मिक यात्रा को आगे बढ़ाता है और जीवन में सुख, समृद्धि और शांति प्राप्त करता है।

FAQs: श्री अन्नपूर्णा जी की आरती (Shri Annapurna Ji Ki Aarti)

1. श्री अन्नपूर्णा जी कौन हैं?

माँ अन्नपूर्णा को खाद्य और समृद्धि की देवी माना जाता है। वे भोजन की आपूर्ति करती हैं और हर व्यक्ति के जीवन में धन, समृद्धि और आध्यात्मिक शांति लाती हैं।

2. श्री अन्नपूर्णा जी की आरती (Shri Annapurna Ji Ki Aarti) का महत्व क्या है?

यह आरती माँ अन्नपूर्णा के आशीर्वाद की प्राप्ति के लिए गाई जाती है। इसे गाने से व्यक्ति के जीवन में धन, सुख और समृद्धि आती है।

3. अन्नपूर्णा जी की पूजा विधि क्या है?

अन्नपूर्णा जी की पूजा में सबसे पहले उनके चित्र या मूर्ति की स्थापना करनी चाहिए, फिर दीप जलाकर और फल एवं भोजन चढ़ाकर पूजा करें। पूजा के बाद आरती का गायन करें।

4. अन्नपूर्णा आरती के बोल क्या हैं?

“जय अन्नपूर्णे सदा पालन कारी, भूख न लगै पिया सब सुखकारी…” यह आरती अन्नपूर्णा जी के आशीर्वाद और कृपा का बखान करती है।

5. अन्नपूर्णा जी की पूजा से क्या लाभ होता है?

अन्नपूर्णा जी की पूजा से आध्यात्मिक समृद्धि, धन की प्राप्ति, और शारीरिक और मानसिक शांति प्राप्त होती है।

6. क्या अन्नपूर्णा जी का रूप कैसा है?

अन्नपूर्णा देवी का रूप सौम्य और शांत होता है, जिनके हाथों में कटोरी और चम्मच होते हैं, जो भोजन वितरण के प्रतीक हैं।

7. अन्नपूर्णा जी की पूजा में क्या चढ़ाना चाहिए?

अन्नपूर्णा जी को पूजा में फल, अन्न, खाना, और फूल अर्पित किए जाते हैं, क्योंकि वे अन्न की देवी हैं।

8. अन्नपूर्णा आरती कब और कैसे गानी चाहिए?

आरती को प्रेम और श्रद्धा से गाया जाना चाहिए। इसे रोजाना या खासतौर पर पूजन अवसरों पर गाना शुभ माना जाता है।

9. क्या अन्नपूर्णा जी की पूजा घर में की जा सकती है?

हां, अन्नपूर्णा जी की पूजा घर पर भी की जा सकती है, इससे घर में धन और समृद्धि बनी रहती है।

10. अन्नपूर्णा जी की पूजा के बाद क्या करें?

पूजा के बाद, आरती का गायन करें और फिर प्रसाद को परिवार के सभी सदस्यो में वितरित करें।

11. अन्नपूर्णा जी की आरती के मानसिक लाभ क्या हैं?

अन्नपूर्णा आरती मानसिक शांति देती है, इससे व्यक्ति के मन में सकारात्मकता और आध्यात्मिक शक्ति का संचार होता है।

12. क्या अन्नपूर्णा आरती का शारीरिक लाभ भी है?

अन्नपूर्णा आरती शारीरिक रूप से व्यक्ति को स्वस्थ और खुशहाल बनाए रखने में मदद करती है।

13. अन्नपूर्णा जी की पूजा किस समय करनी चाहिए?

अन्नपूर्णा जी की पूजा विशेष रूप से सुबह या रात के समय करनी चाहिए, जब घर में शांति हो।

14. अन्नपूर्णा जी की पूजा में कौन सी सामग्री जरूरी है?

पूजा में दीपक, अगरबत्तियां, फूल, फल, और भोजन चढ़ाना आवश्यक है।

15. क्या अन्नपूर्णा जी की पूजा में मंत्र का उच्चारण भी जरूरी है?

अन्नपूर्णा जी की पूजा में मंत्रों का उच्चारण भी शुभ होता है, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण है प्रेम और श्रद्धा से पूजा करना।

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