घर के उत्तर-पूर्व कोने में रखें ये 7 चीज़ें, देवी लक्ष्मी (Goddess Lakshmi) खुद चलकर आएंगी!

Soma
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घर के उत्तर-पूर्व कोने में रखें ये 7 चीज़ें, देवी लक्ष्मी (Goddess Lakshmi) खुद चलकर आएंगी!

घर के उत्तर-पूर्व कोने में रखें ये 7 चीज़ें, देवी लक्ष्मी (Goddess Lakshmi) खुद चलकर आएंगी!


घर के उत्तर-पूर्व दिशा में रखें ये वस्तुएँ – सुख, समृद्धि और शांति का राज़

भारतीय वास्तुशास्त्र में घर की उत्तर-पूर्व दिशा (ईशान कोण) को सबसे पवित्र और ऊर्जावान दिशा माना गया है। यह दिशा भगवान शिव और देवी लक्ष्मी (Goddess Lakshmi) का स्थान मानी जाती है। अगर इस दिशा में सही चीज़ें रखी जाएँ और साफ-सफाई का ध्यान रखा जाए, तो घर में शांति, सकारात्मक ऊर्जा, और धन-समृद्धि बनी रहती है। इस लेख में हम आपको बताएँगे कि उत्तर-पूर्व दिशा में किन-किन वास्तु अनुसार वस्तुओं को रखने से जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आता है।

Contents

उत्तर-पूर्व दिशा का महत्व क्या है?

उत्तर-पूर्व दिशा को वास्तु में ईशान कोण कहा जाता है, और यह दिशा सूर्य की पहली किरण को ग्रहण करती है। यह स्थान शुद्ध और शांत होना चाहिए क्योंकि यहीं से सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश होता है। यदि यह दिशा अवरोधित या गंदगी से भरी हो, तो पूरे घर में नकारात्मकता फैलती है।

इस दिशा में पूजा घर, जल स्त्रोत, या ध्यान का स्थान बनाना बहुत शुभ माना जाता है। इससे परिवार के सदस्य मानसिक रूप से शांत और आर्थिक रूप से स्थिर रहते हैं।


क्या रखें उत्तर-पूर्व दिशा में?

अब हम जानेंगे कि उत्तर-पूर्व दिशा में किन वस्तुओं को रखने से देवी लक्ष्मी और सकारात्मक ऊर्जा का स्थाई निवास बनता है:


1. पूजा घर रखें उत्तर-पूर्व में

उत्तर-पूर्व दिशा में मंदिर या पूजा घर बनाना सबसे अधिक शुभ माना गया है। इस दिशा में पूजा करने से आपकी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं और ईश्वर का आशीर्वाद हमेशा बना रहता है। कोशिश करें कि भगवान की मूर्तियाँ पूर्व या पश्चिम की ओर मुख करके रखी जाएँ और पूजा करते समय आपका मुख उत्तर या पूर्व की ओर हो।

ध्यान रखें कि पूजा घर में जूते-चप्पल, झाड़ू, या अनावश्यक वस्तुएँ न हों। वहां साफ-सफाई बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है।


2. जल का स्रोत – एक्वेरियम या पानी का बर्तन

वास्तु के अनुसार जल तत्व उत्तर-पूर्व दिशा से जुड़ा हुआ है। इसलिए इस दिशा में कोई पानी का बर्तन, फव्वारा, या एक्वेरियम रखना बहुत शुभ होता है। इससे घर में शांति, सकारात्मक ऊर्जा, और आर्थिक स्थिरता आती है।

एक्वेरियम में रंग-बिरली मछलियाँ रखें लेकिन ध्यान रहे कि एक्वेरियम हमेशा साफ रहे और पानी ताजगी से भरा हो। गंदा पानी वास्तु दोष को जन्म देता है।


3. क्रिस्टल बॉल्स या पिरामिड रखें

उत्तर-पूर्व दिशा में क्रिस्टल बॉल्स या स्फटिक पिरामिड रखना वास्तु में बहुत शुभ माना जाता है। ये वस्तुएँ ऊर्जा को संतुलित करती हैं और घर के वातावरण को शांत बनाती हैं। क्रिस्टल या स्फटिक की चीज़ें प्राकृतिक ऊर्जा को आकर्षित करती हैं और नकारात्मक ऊर्जा को दूर करती हैं।

सफेद या पारदर्शी रंग के पिरामिड सबसे उपयुक्त होते हैं। इन्हें ध्यानपूर्वक साफ रखें और सप्ताह में एक बार गंगाजल से पोंछें।


4. तुलसी का पौधा लगाएँ

अगर आपके घर में बालकनी या खुला स्थान उत्तर-पूर्व दिशा में है, तो वहां तुलसी का पौधा लगाना बहुत शुभ माना जाता है। तुलसी घर में शुद्धता, धार्मिकता, और सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखती है।

तुलसी के पौधे को प्रतिदिन जल देना और दीपक जलाना न भूलें। इससे देवी लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और घर में स्वास्थ्य और समृद्धि आती है।


5. सफेद रंग का प्रयोग करें

उत्तर-पूर्व दिशा में दीवारों पर सफेद, हल्का पीला, या हल्का नीला रंग करवाना वास्तु के अनुसार उत्तम होता है। ये रंग शांति, संतुलन, और सकारात्मक ऊर्जा के प्रतीक हैं।

काले, गहरे लाल या भूरे रंग से परहेज़ करें क्योंकि ये रंग नकारात्मकता फैलाते हैं और मानसिक बेचैनी को बढ़ाते हैं। हल्के रंगों से कमरा बड़ा और खुला लगता है।


6. ध्यान और योग का स्थान बनाएँ

यदि आपके पास पर्याप्त जगह है, तो उत्तर-पूर्व दिशा में ध्यान, योग, या प्राणायाम का स्थान बनाएं। यह दिशा मानसिक और आध्यात्मिक विकास के लिए सबसे अनुकूल होती है।

इस स्थान पर आप रोज़ 15-20 मिनट ध्यान करें, शांत संगीत चलाएँ या दीपक जलाएँ। यह आदत आपके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाएगी।


7. देवी लक्ष्मी की फोटो या चित्र लगाएँ

उत्तर-पूर्व दिशा में देवी लक्ष्मी, भगवान विष्णु, या गणेश जी की तस्वीर लगाना शुभ माना गया है। विशेष रूप से वो चित्र जिसमें लक्ष्मी जी कमल पर विराजमान हैं और सोने के सिक्के गिरा रही हैं, उन्हें घर में लगाना अत्यंत लाभकारी होता है।

तस्वीर को ऐसे स्थान पर लगाएँ जहाँ हर रोज़ उसकी दृष्टि पड़ती रहे और पूजा करते समय उसकी ओर देखना संभव हो।


उत्तर-पूर्व दिशा में न रखें ये चीज़ें

अब जानते हैं कि किन वस्तुओं को उत्तर-पूर्व दिशा में नहीं रखना चाहिए क्योंकि ये नकारात्मक ऊर्जा को आमंत्रित करती हैं:

  • भारी फर्नीचर जैसे सोफा, आलमारी
  • कचरा या गंदगी
  • इलेक्ट्रॉनिक आइटम्स जैसे माइक्रोवेव, टीवी
  • काले रंग की सजावटी वस्तुएँ
  • झाड़ू या जूते

इन वस्तुओं से ईशान कोण की शक्ति कमजोर हो जाती है और वास्तु दोष उत्पन्न होता है।


उत्तर-पूर्व दिशा में साफ-सफाई क्यों है ज़रूरी?

इस दिशा में गंदगी या अव्यवस्था का सीधा असर घर के वास्तु संतुलन पर पड़ता है। इससे न केवल धन हानि होती है, बल्कि परिवार के सदस्यों को मानसिक तनाव, स्वास्थ्य समस्याएं, और झगड़े भी होते हैं। इसलिए:

  • रोज़ झाड़ू-पोंछा करें।
  • इस स्थान पर कोई टूटा सामान न रखें।
  • यहां हमेशा हल्का सुगंधित वातावरण बनाकर रखें।
घर के उत्तर-पूर्व कोने में रखें ये 7 चीज़ें, देवी लक्ष्मी (Goddess Lakshmi) खुद चलकर आएंगी!
घर के उत्तर-पूर्व कोने में रखें ये 7 चीज़ें, देवी लक्ष्मी (Goddess Lakshmi) खुद चलकर आएंगी!

कैसे जानें उत्तर-पूर्व दिशा सही है या नहीं?

आप घर में कुछ संकेत देखकर यह जान सकते हैं कि उत्तर-पूर्व दिशा सही है या नहीं:

  • घर में हमेशा हल्की हवा और रौशनी रहती है – शुभ संकेत।
  • इस कोने में गंध आती है या अंधेरा बना रहता है – अशुभ संकेत।
  • परिवार में हमेशा तनाव, बीमारियाँ या खर्चा अधिक हो – वास्तु दोष हो सकता है।

वास्तु उपाय अगर दिशा दोष हो

यदि किसी कारणवश उत्तर-पूर्व दिशा में पूजा घर, जल स्रोत या तुलसी नहीं रख सकते, तो आप ये वास्तु उपाय करें:

  • वहां पर क्रिस्टल बॉल या पिरामिड रखें।
  • ईशान कोण में हर रोज़ धूप-दीप दिखाएँ।
  • उस दिशा में देवी लक्ष्मी का चित्र लगाएँ।
  • वास्तु दोष निवारण के लिए किसी जानकार से सलाह लें।

उत्तर-पूर्व दिशा केवल वास्तु की दृष्टि से ही नहीं, बल्कि आध्यात्मिक और मानसिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि आप इस दिशा में सही वस्तुएँ रखें और साफ-सफाई बनाए रखें, तो निश्चित ही घर में धन, स्वास्थ्य, शांति और समृद्धि बनी रहेगी।

अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए आज ही उत्तर-पूर्व दिशा की स्थिति का निरीक्षण करें और बताए गए उपाय अपनाएँ।


यह रहे “घर के उत्तर-पूर्व दिशा में रखें ये वस्तुएँ” विषय पर आधारित 15 महत्वपूर्ण FAQs,


1. उत्तर-पूर्व दिशा किसे कहते हैं?

उत्तर और पूर्व दिशा के बीच का कोण उत्तर-पूर्व दिशा कहलाता है, जिसे ईशान कोण भी कहते हैं।


2. उत्तर-पूर्व दिशा क्यों महत्वपूर्ण मानी जाती है?

यह दिशा सकारात्मक ऊर्जा, आध्यात्मिकता और शुद्धता की प्रतीक है। यह घर में शांति और समृद्धि लाने में सहायक मानी जाती है।


3. क्या पूजा घर उत्तर-पूर्व दिशा में होना चाहिए?

जी हाँ, पूजा घर इसी दिशा में बनाना सबसे शुभ माना जाता है। इससे ईश्वर की कृपा बनी रहती है।


4. क्या इस दिशा में जल स्रोत रखना लाभकारी है?

हाँ, उत्तर-पूर्व दिशा में एक्वेरियम, जल पात्र या फव्वारा रखना वास्तु के अनुसार शुभ होता है।


5. क्या भारी फर्नीचर उत्तर-पूर्व में रख सकते हैं?

नहीं, इस दिशा में भारी फर्नीचर रखना वर्जित है। इससे ऊर्जा प्रवाह रुक जाता है और वास्तु दोष होता है।


6. उत्तर-पूर्व दिशा में कौन-से पौधे लगाना शुभ होता है?

तुलसी, श्वेत पुष्पों वाले पौधे और हल्के रंग के सुगंधित पौधे इस दिशा के लिए उत्तम होते हैं।


7. क्या देवी लक्ष्मी (Goddess Lakshmi) की फोटो उत्तर-पूर्व में लगा सकते हैं?

हाँ, देवी लक्ष्मी, भगवान विष्णु या गणेश जी की तस्वीरें यहां लगाना शुभ फलदायक होता है।


8. क्या इलेक्ट्रॉनिक सामान उत्तर-पूर्व में रखना सही है?

नहीं, इस दिशा में टीवी, माइक्रोवेव, कम्प्यूटर जैसे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण रखने से बचना चाहिए।


9. इस दिशा में कौन से रंग उपयोग करें?

सफेद, हल्का नीला, या हल्का पीला रंग इस दिशा के लिए अनुकूल माने जाते हैं।


10. क्या उत्तर-पूर्व दिशा में सो सकते हैं?

नहीं, सोने के लिए यह दिशा उपयुक्त नहीं मानी जाती। यह ध्यान, पूजा या शुद्धता के लिए उत्तम है।


11. अगर इस दिशा में टॉयलेट है तो क्या करें?

ऐसी स्थिति में वास्तु उपाय जैसे स्फटिक पिरामिड, धूप-दीप, और विशेष Yantra का उपयोग करें और विशेषज्ञ से सलाह लें।


12. उत्तर-पूर्व दिशा में ध्यान करने के क्या लाभ हैं?

इस दिशा में ध्यान करने से मानसिक शांति, सकारात्मक सोच और आध्यात्मिक उन्नति होती है।


13. इस दिशा की गंदगी का क्या प्रभाव होता है?

गंदगी से ऊर्जा का प्रवाह बाधित होता है, जिससे धन हानि, मानसिक तनाव और परिवार में कलह हो सकता है।


14. क्या इस दिशा में शोपीस या सजावटी वस्तुएँ रख सकते हैं?

अगर हल्की, शुभ और साफ-सुथरी सजावटी वस्तुएँ हैं तो रख सकते हैं, लेकिन काले रंग से बचें।


15. क्या उत्तर-पूर्व दिशा में वास्तु दोष का समाधान संभव है?

हाँ, उचित वास्तु उपाय, साफ-सफाई, शुभ वस्तुओं का स्थान, और सकारात्मक वातावरण से दोषों को ठीक किया जा सकता है।


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