वरद चतुर्थी 2025: इस शुभ दिन पर ऐसे करें गणेश पूजा, (Ganesh Puja) मिलेगी हर मनोकामना!

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वरद चतुर्थी 2025: इस शुभ दिन पर ऐसे करें गणेश पूजा, (Ganesh Puja) मिलेगी हर मनोकामना!


वरद चतुर्थी 2025: इस शुभ दिन पर ऐसे करें गणेश पूजा, (Ganesh Puja) मिलेगी हर मनोकामना!


वरद चतुर्थी पर गणेश पूजा (Ganesh Puja) के नियम और लाभ

वरद चतुर्थी भगवान गणेश जी की उपासना का एक अत्यंत शुभ दिन होता है। इस दिन गणपति बप्पा की विधिपूर्वक पूजा करने से सभी इच्छाएं पूर्ण होती हैं और भक्तों को विशेष वरदान (वरद) प्राप्त होता है। इस लेख में हम आपको वरद चतुर्थी के महत्व, पूजा विधि, नियम और लाभ के बारे में विस्तार से बताएंगे।

Contents
वरद चतुर्थी 2025: इस शुभ दिन पर ऐसे करें गणेश पूजा, (Ganesh Puja) मिलेगी हर मनोकामना!वरद चतुर्थी पर गणेश पूजा (Ganesh Puja) के नियम और लाभवरद चतुर्थी का महत्ववरद चतुर्थी व्रत और पूजा विधिवरद चतुर्थी व्रत के नियमवरद चतुर्थी व्रत के लाभवरद चतुर्थी से जुड़े खास उपायवरद चतुर्थी की पौराणिक कथावरद चतुर्थी पर गणेश पूजा (Ganesh Puja) से जुड़ महत्वपूर्ण प्रश्न और उत्तर1. वरद चतुर्थी कब मनाई जाती है?2. वरद चतुर्थी का महत्व क्या है?3. इस दिन व्रत कैसे रखा जाता है?4. वरद चतुर्थी पर कौन-कौन से नियम पालन करने चाहिए?5. गणेश पूजा के लिए कौन-कौन से सामग्री आवश्यक होती हैं?6. वरद चतुर्थी पर किस मंत्र का जाप करना चाहिए?7. इस दिन कौन सी आरती करनी चाहिए?8. वरद चतुर्थी की कथा क्या है?9. वरद चतुर्थी का उपवास कौन कर सकता है?10. वरद चतुर्थी के दिन कौन से शुभ कार्य करने चाहिए?11. क्या इस दिन चंद्र दर्शन वर्जित है?12. वरद चतुर्थी पर किन चीजों का दान करना शुभ होता है?13. वरद चतुर्थी पर मोदक क्यों चढ़ाए जाते हैं?14. वरद चतुर्थी पर कौन से उपाय करने चाहिए?15. वरद चतुर्थी का व्रत करने से कौन-कौन से लाभ मिलते हैं?

वरद चतुर्थी का महत्व

वरद चतुर्थी को माघ माह में आने वाली शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है। इसे गणेश जयंती के रूप में भी जाना जाता है, क्योंकि यह भगवान गणेश के जन्म का पावन दिन माना जाता है। हिंदू धर्म में गणेश जी को विघ्नहर्ता, बुद्धि प्रदाता और शुभ फल देने वाले देवता माना जाता है।

इस दिन संकल्पपूर्वक व्रत और पूजा करने से जीवन में सुख, समृद्धि और सफलता मिलती है। जो लोग किसी विशेष मनोकामना की पूर्ति चाहते हैं, उन्हें इस दिन गणेश जी की पूजा जरूर करनी चाहिए।


वरद चतुर्थी व्रत और पूजा विधि

1. सूर्योदय से पहले स्नान करें – इस दिन प्रातःकाल उठकर गंगा जल से स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।

2. संकल्प लें – गणेश जी की पूजा के लिए मन में संकल्प लें कि आप विधिपूर्वक व्रत का पालन करेंगे।

3. गणेश प्रतिमा की स्थापना करें – घर के पूजा स्थल में गणेश जी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।

4. पंचोपचार या षोडशोपचार पूजा करें – गणेश जी को गंगा जल, अक्षत, चंदन, पुष्प, दूर्वा, मोदक, फल, धूप और दीप अर्पित करें।

5. गणेश मंत्रों का जाप करें

  • “ॐ गं गणपतये नमः”
  • “वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभः। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥”

6. कथा और आरती करें – गणेश जी की व्रत कथा का पाठ करें और आरती करें।

7. प्रसाद वितरण – पूजा के बाद मोदक, लड्डू या अन्य मीठे प्रसाद का वितरण करें।


वरद चतुर्थी व्रत के नियम

  1. निर्जला या फलाहार व्रत रखें – इस दिन कई भक्त निर्जला व्रत रखते हैं, जबकि कुछ लोग केवल फलाहार ग्रहण करते हैं।
  2. सात्विक भोजन करें – यदि कोई व्यक्ति व्रत नहीं रख सकता तो सात्विक भोजन ग्रहण करे।
  3. नकारात्मक विचारों से बचें – इस दिन क्रोध, लोभ, झूठ और बुरी संगति से बचें।
  4. शराब और मांसाहार का त्याग करें – इस दिन शुद्धता और सात्विकता का पालन करें।
  5. ब्राह्मणों को भोजन कराएं – पूजा के बाद ब्राह्मणों और गरीबों को भोजन कराना शुभ माना जाता है।

वरद चतुर्थी व्रत के लाभ

  1. सभी प्रकार की बाधाएं दूर होती हैं – गणेश जी को विघ्नहर्ता कहा जाता है, उनकी पूजा से जीवन के सभी संकट दूर हो जाते हैं।
  2. बुद्धि और ज्ञान की प्राप्ति – छात्र और विद्या-अभिलाषी लोग इस दिन पूजा करें तो विद्या और बुद्धि का वरदान प्राप्त होता है।
  3. धन, समृद्धि और व्यापार में वृद्धि – व्यापारी और नौकरीपेशा लोग यदि इस दिन व्रत रखें, तो आर्थिक उन्नति और व्यवसाय में वृद्धि होती है।
  4. सुख-शांति और परिवार में खुशहाली – इस दिन पूजा करने से परिवार में प्रेम और सद्भाव बढ़ता है
  5. मनोकामनाओं की पूर्ति होती है – यह वरदान देने वाला व्रत है, जो भी सच्चे मन से पूजा करता है, उसकी इच्छाएं पूर्ण होती हैं

वरद चतुर्थी से जुड़े खास उपाय

  1. गणेश जी को 21 दूर्वा अर्पित करें – इससे आयु, आरोग्य और सफलता का आशीर्वाद मिलता है।
  2. मोदक या लड्डू का भोग लगाएं – गणपति बप्पा को मोदक अत्यंत प्रिय हैं, इससे मनचाहा वरदान प्राप्त होता है।
  3. गणेश मंत्र का 108 बार जाप करें – इससे सभी कार्यों में सफलता प्राप्त होती है।
  4. पीपल के वृक्ष पर जल चढ़ाएं – इससे पितृ दोष और अन्य कष्ट दूर होते हैं
  5. गाय को हरा चारा खिलाएं – इससे घर में सुख-शांति बनी रहती है।

वरद चतुर्थी की पौराणिक कथा

पुराणों के अनुसार, एक बार देवताओं और ऋषियों ने गणेश जी की घोर तपस्या की। तप से प्रसन्न होकर गणपति बप्पा ने वरदान दिया कि जो भक्त वरद चतुर्थी के दिन मेरी पूजा करेगा, उसकी सभी इच्छाएं पूर्ण होंगी

वरद चतुर्थी 2025: इस शुभ दिन पर ऐसे करें गणेश पूजा, (Ganesh Puja) मिलेगी हर मनोकामना!
वरद चतुर्थी 2025: इस शुभ दिन पर ऐसे करें गणेश पूजा, (Ganesh Puja) मिलेगी हर मनोकामना!

दूसरी कथा के अनुसार, एक व्यापारी को आर्थिक तंगी से गुजरना पड़ा। उसने वरद चतुर्थी का व्रत और पूजा की, जिससे उसकी सभी परेशानियां दूर हो गईं और उसे धन-समृद्धि प्राप्त हुई


वरद चतुर्थी भगवान गणेश की कृपा पाने का शुभ अवसर है। इस दिन नियमपूर्वक व्रत और पूजा करने से जीवन में सुख, समृद्धि, ज्ञान और सफलता प्राप्त होती है। यदि आप भी गणपति बप्पा का आशीर्वाद पाना चाहते हैं, तो इस शुभ दिन पर व्रत रखें और विधिपूर्वक पूजा करें

वरद चतुर्थी पर गणेश पूजा (Ganesh Puja) से जुड़ महत्वपूर्ण प्रश्न और उत्तर

1. वरद चतुर्थी कब मनाई जाती है?

वरद चतुर्थी माघ माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाई जाती है। यह आमतौर पर जनवरी या फरवरी में आती है।

2. वरद चतुर्थी का महत्व क्या है?

इस दिन भगवान गणेश की पूजा करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन के सभी विघ्न दूर होते हैं। इसे वरदान देने वाली चतुर्थी कहा जाता है।

3. इस दिन व्रत कैसे रखा जाता है?

वरद चतुर्थी पर भक्त निर्जला व्रत या फलाहार व्रत रखते हैं। दिनभर भगवान गणेश की उपासना कर, शाम को पूजा के बाद प्रसाद ग्रहण किया जाता है।

4. वरद चतुर्थी पर कौन-कौन से नियम पालन करने चाहिए?

  • सात्विक भोजन करें
  • मांसाहार और नशे से दूर रहें
  • क्रोध और नकारात्मकता से बचें
  • संकल्पपूर्वक व्रत और पूजा करें

5. गणेश पूजा के लिए कौन-कौन से सामग्री आवश्यक होती हैं?

पूजा के लिए गणेश प्रतिमा, मोदक, दूर्वा, पुष्प, कुमकुम, अक्षत, धूप, दीप और गंगा जल जरूरी होते हैं।

6. वरद चतुर्थी पर किस मंत्र का जाप करना चाहिए?

ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का 108 बार जाप करने से गणपति जी की कृपा प्राप्त होती है।

7. इस दिन कौन सी आरती करनी चाहिए?

गणेश जी की पूजा में “जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा” और “सुखकर्ता दुखहर्ता” आरती करना शुभ होता है।

8. वरद चतुर्थी की कथा क्या है?

एक कथा के अनुसार, एक व्यापारी आर्थिक संकट में था। उसने वरद चतुर्थी का व्रत किया, जिससे उसकी समस्याएं दूर हो गईं और उसे धन-समृद्धि प्राप्त हुई

9. वरद चतुर्थी का उपवास कौन कर सकता है?

यह व्रत सभी लोग कर सकते हैं, विशेष रूप से वे जो समृद्धि, सफलता और ज्ञान की प्राप्ति चाहते हैं।

10. वरद चतुर्थी के दिन कौन से शुभ कार्य करने चाहिए?

इस दिन गरीबों को भोजन कराना, ब्राह्मणों को दान देना और गणेश मंदिर में दर्शन करना बहुत शुभ माना जाता है।

11. क्या इस दिन चंद्र दर्शन वर्जित है?

नहीं, वरद चतुर्थी पर चंद्र दर्शन का कोई निषेध नहीं है। यह नियम केवल संकष्टी चतुर्थी पर लागू होता है।

12. वरद चतुर्थी पर किन चीजों का दान करना शुभ होता है?

इस दिन गुड़, तिल, वस्त्र, अनाज और गणेश जी की प्रतिमा का दान करना बहुत शुभ माना जाता है।

13. वरद चतुर्थी पर मोदक क्यों चढ़ाए जाते हैं?

मोदक गणपति बप्पा का प्रिय भोग है। इसे चढ़ाने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और गणेश जी की विशेष कृपा मिलती है।

14. वरद चतुर्थी पर कौन से उपाय करने चाहिए?

  • गणेश मंदिर में 21 दूर्वा चढ़ाएं
  • गाय को हरा चारा खिलाएं
  • गणेश मंत्रों का जाप करें
  • गरीबों को भोजन कराएं

15. वरद चतुर्थी का व्रत करने से कौन-कौन से लाभ मिलते हैं?

  • सभी कष्ट और विघ्न दूर होते हैं
  • बुद्धि और ज्ञान की प्राप्ति होती है
  • धन और समृद्धि में वृद्धि होती है
  • मनोकामनाएं पूरी होती हैं
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