अक्षय तृतीया (Akshaya Tritiya) पर सोना क्यों खरीदते हैं? जानिए इस परंपरा का रहस्य और चमत्कारी लाभ!
अक्षय तृतीया (Akshaya Tritiya) पर सोना खरीदने की परंपरा
अक्षय तृतीया (Akshaya Tritiya) क्या है?
अक्षय तृतीया (Akshaya Tritiya) एक पवित्र हिंदू त्योहार है, जिसे वैशाख मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। इसे “अखतेज” भी कहा जाता है। यह दिन सदैव शुभ माना जाता है और किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत के लिए मुहूर्त देखने की आवश्यकता नहीं होती।
“अक्षय” का अर्थ होता है – जो कभी क्षय न हो, अर्थात जो हमेशा बना रहे। इस दिन किया गया कोई भी पुण्य या कार्य स्थायी और फलदायी माना जाता है। इसी कारण इस दिन सोना खरीदने की परंपरा विशेष महत्व रखती है।
अक्षय तृतीया (Akshaya Tritiya) का धार्मिक महत्व
हिंदू धर्म में अक्षय तृतीया को अत्यंत पवित्र और शुभ दिन माना गया है। मान्यता है कि इस दिन:
- भगवान विष्णु ने परशुराम अवतार लिया था।
- महाभारत का लेखन इसी दिन शुरू हुआ था।
- गंगा नदी का धरती पर आगमन भी अक्षय तृतीया को हुआ था।
इस दिन दान, जप, तप, स्नान, व्रत और पूजा का विशेष महत्व होता है। यह दिन धन, सुख और समृद्धि को बढ़ाने वाला दिन माना गया है।
सोना खरीदने की परंपरा की शुरुआत कैसे हुई?
सोना खरीदने की परंपरा के पीछे पौराणिक और ज्योतिषीय कारण हैं। ऐसा माना जाता है कि अक्षय तृतीया के दिन खरीदी गई वस्तु, विशेषकर सोना, हमेशा बढ़ता है और कभी क्षय नहीं होता।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, माता लक्ष्मी इस दिन अपने भक्तों को अक्षय धन का आशीर्वाद देती हैं। इसलिए लोग इस दिन सोना या चांदी खरीदकर समृद्धि और सौभाग्य का प्रतीक मानते हैं।
सोना क्यों खरीदते हैं इस दिन?
सोना हिंदू संस्कृति में शुद्धता, वैभव और सौभाग्य का प्रतीक है। अक्षय तृतीया पर सोना खरीदने के कारण:
- यह धन की वृद्धि का संकेत माना जाता है।
- सोना माँ लक्ष्मी का रूप है।
- इसे वास्तु और ज्योतिष में शुभ धातु माना गया है।
- व्यापार और घर में समृद्धि बनी रहती है।
इस दिन सोने के सिक्के, आभूषण, श्री यंत्र या लक्ष्मी की मूर्ति खरीदना विशेष लाभकारी माना गया है।
लक्ष्मी पूजन और सोने का संबंध
माता लक्ष्मी को धन, वैभव और ऐश्वर्य की देवी माना गया है। अक्षय तृतीया पर यदि कोई भक्त श्रद्धा से लक्ष्मी पूजन करता है और सोना खरीदकर उसे लक्ष्मी रूप में पूजता है, तो घर में धनवृद्धि और समृद्धि बनी रहती है।
इस दिन पूजा में सोना, केसर, चावल, कमल, तुलसी और पंचामृत का उपयोग किया जाता है। सोना मां लक्ष्मी को अत्यंत प्रिय है, इसलिए इसे धार्मिक उपहार और पूजन सामग्री के रूप में भी प्रयोग किया जाता है।
सोने के साथ क्या खरीदना और क्या नहीं खरीदना चाहिए?
अक्षय तृतीया पर निम्न वस्तुएँ खरीदना अत्यंत शुभ माना गया है:
- सोना और चांदी के सिक्के या आभूषण
- पीतल के बर्तन
- शंख, श्री यंत्र, स्वर्ण लक्ष्मी मूर्ति
- वास्तु से संबंधित वस्तुएँ जैसे धातु के कछुए, धातु की लक्ष्मी चरण
लेकिन कुछ वस्तुएँ इस दिन नहीं खरीदनी चाहिए:
- लोहे से बनी वस्तुएँ
- तेज धारदार वस्तुएँ
- काले रंग की चीज़ें
- कर्ज लेना या देना
ज्योतिषीय दृष्टिकोण से अक्षय तृतीया और सोना
ज्योतिष के अनुसार, अक्षय तृतीया पर सूर्य और चंद्रमा दोनों ही उच्च राशि में होते हैं। यह योग अत्यंत दुर्लभ और शुभ होता है।
इस दिन सोना खरीदना नवग्रहों को संतुलित करता है, विशेषकर शुक्र और गुरु। इन ग्रहों का संबंध धन और वैभव से होता है।
इसलिए यदि कोई व्यक्ति अक्षय तृतीया पर सोना खरीदता है, तो उसका जीवन आर्थिक रूप से सुदृढ़ होता है और उसे पारिवारिक सुख की प्राप्ति होती है।
धन की स्थिरता का प्रतीक: सोना
अक्षय तृतीया पर सोना खरीदना धन की स्थिरता और निरंतरता का प्रतीक माना जाता है।
कई लोग मानते हैं कि इस दिन खरीदा गया सोना परिवार के भविष्य के लिए रक्षा कवच का काम करता है।
सोने को भविष्य की पूंजी के रूप में भी देखा जाता है, जो किसी भी आपात स्थिति में सहारा बन सकता है।
परंपरा से व्यापार तक: सोने की बढ़ती मांग
अक्षय तृतीया के समय सोने की बिक्री में भारी वृद्धि होती है। ज्वेलरी शॉप्स इस अवसर पर विशेष ऑफर्स और छूट प्रदान करते हैं।
ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर भी इस दिन डिजिटल गोल्ड खरीदने की सुविधा उपलब्ध होती है।
यह परंपरा अब सिर्फ धार्मिक पक्ष तक सीमित नहीं रही, बल्कि आर्थिक दृष्टिकोण से भी मजबूत निवेश विकल्प बन चुकी है।
डिजिटल गोल्ड: आधुनिक युग की परंपरा
आज के डिजिटल युग में लोग डिजिटल गोल्ड खरीदना पसंद कर रहे हैं। यह न केवल सुरक्षित है, बल्कि इसे कभी भी बेचा या ट्रांसफर किया जा सकता है।
डिजिटल गोल्ड के लाभ:
- 100% शुद्धता
- न्यूनतम निवेश (₹1 से शुरू)
- सेक्योर स्टोरेज
- ऑनलाइन बिक्री और खरीद की सुविधा
यह परंपरागत सोने की खरीदारी का आधुनिक और सुविधाजनक विकल्प बन चुका है।
शुभ मुहूर्त पर खरीदी का लाभ
अक्षय तृतीया को अबूझ मुहूर्त माना जाता है। इस दिन बिना किसी ज्योतिषीय सलाह के भी सोना खरीद सकते हैं।
परंतु कुछ लोग अब भी विशेष मुहूर्त का ध्यान रखते हैं, जैसे:
- प्रात:कालीन समय (6-10 बजे)
- दोपहर का समय (12-2 बजे)
- शुभ योग जैसे रवि योग, सिद्धि योग आदि
यदि आप इस दिन सोना खरीदने जा रहे हैं, तो किसी भी अपशकुन से बचकर शांत मन से खरीदारी करें।

विवाह और निवेश में सोने की भूमिका
भारत में विवाह का अर्थ सोने के बिना अधूरा माना जाता है। अक्षय तृतीया पर विवाह के लिए सोना खरीदना शुभ माना जाता है।
यह दिन नए विवाह संबंधों की शुरुआत, सगाई, या गृहप्रवेश के लिए भी उत्तम है।
इसके अतिरिक्त, जो लोग निवेश की सोच रखते हैं, वे सोने की मुद्राएँ, बिस्किट, या गोल्ड बॉन्ड खरीदते हैं जो लंबे समय तक मूल्य में वृद्धि करते हैं।
सोना: सिर्फ धातु नहीं, आस्था का प्रतीक
भारतीय संस्कृति में सोना केवल धन नहीं, बल्कि धार्मिक श्रद्धा और परंपरा का प्रतीक है।
यह मां लक्ष्मी की कृपा, घर की शुद्धता, और भविष्य की सुरक्षा का प्रतीक है। अक्षय तृतीया इस परंपरा को न केवल सहेजता है, बल्कि हर साल इसे नवीन ऊर्जा भी प्रदान करता है।
परंपरा, श्रद्धा और समृद्धि का संगम
अक्षय तृतीया पर सोना खरीदना सिर्फ एक रिवाज नहीं, बल्कि यह हमारे विश्वास, समृद्धि और भविष्य की सुरक्षा का प्रतीक बन चुका है।
यह दिन हमें यह सिखाता है कि जब सच्ची श्रद्धा और शुभ अवसर मिलते हैं, तो वे जीवन को सफल और समृद्ध बना सकते हैं।
यदि आप भी अपने जीवन में स्थायी सुख, धन और शांति की कामना करते हैं, तो अक्षय तृतीया पर श्रद्धा और नियम से सोना अवश्य खरीदें – यह परंपरा केवल धातु की नहीं, बल्कि सौभाग्य की कहानी है।
अक्षय तृतीया (Akshaya Tritiya) पर सोना खरीदने की परंपरा (FAQS)
1. अक्षय तृतीया (Akshaya Tritiya) क्या है?
उत्तर: अक्षय तृतीया हिन्दू पंचांग के अनुसार वैशाख शुक्ल तृतीया को मनाई जाती है। यह दिन शुभ, पुण्यदायी और सौभाग्यवर्धक माना जाता है।
2. अक्षय तृतीया (Akshaya Tritiya) पर सोना क्यों खरीदा जाता है?
उत्तर: यह मान्यता है कि इस दिन खरीदा गया सोना कभी नष्ट नहीं होता और जीवन में स्थायी समृद्धि लाता है।
3. क्या इस दिन सोना खरीदना जरूरी है?
उत्तर: जरूरी नहीं, लेकिन यह परंपरा सौभाग्य और धनवृद्धि की कामना से जुड़ी है, इसलिए लोग इसे श्रद्धा से निभाते हैं।
4. अक्षय तृतीया (Akshaya Tritiya) पर सोने के अलावा क्या खरीद सकते हैं?
उत्तर: चांदी, पीतल के बर्तन, श्री यंत्र, देवी लक्ष्मी की मूर्ति, भूमि या संपत्ति, वस्त्र, या कोई मूल्यवान वस्तु खरीदी जा सकती है।
5. क्या इस दिन कर्ज लेना या देना उचित है?
उत्तर: नहीं, अक्षय तृतीया पर कर्ज लेना या देना अशुभ माना जाता है क्योंकि यह धन की हानि का संकेत देता है।
6. इस दिन पूजा कैसे करें?
उत्तर: भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करें, पीला वस्त्र पहनें, तुलसी, केसर, चावल, फूल, पंचामृत और घी दीपक से पूजा करें।
7. सोना खरीदने का शुभ समय क्या होता है?
उत्तर: अक्षय तृतीया को अबूझ मुहूर्त माना जाता है, फिर भी प्रात:काल और दोपहर का समय अधिक शुभ माना जाता है।
8. डिजिटल गोल्ड खरीदना शुभ है क्या?
उत्तर: हाँ, आधुनिक युग में डिजिटल गोल्ड खरीदना भी परंपरा के अनुरूप ही सौभाग्यशाली माना जा रहा है।
9. क्या अक्षय तृतीया (Akshaya Tritiya) पर नया व्यवसाय शुरू कर सकते हैं?
उत्तर: हाँ, यह दिन किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत के लिए आदर्श माना जाता है, व्यापार या नौकरी की शुरुआत शुभफलदायक होती है।
10. इस दिन विवाह क्यों होते हैं?
उत्तर: अक्षय तृतीया पर बिना मुहूर्त के भी विवाह संभव होता है क्योंकि यह दिन स्वयं में अत्यंत शुभ होता है।
11. सोना किस रूप में खरीदना अधिक लाभदायक है?
उत्तर: लक्ष्मी के पैरों के चिह्न, सोने के सिक्के, आभूषण या निवेश योग्य गोल्ड बिस्किट शुभ माने जाते हैं।
12. क्या सोने को उसी दिन पहन सकते हैं?
उत्तर: हाँ, यदि पूजा के बाद पहनें तो अत्यंत शुभ होता है। इसे माँ लक्ष्मी के आशीर्वाद के रूप में देखा जाता है।
13. अक्षय तृतीया (Akshaya Tritiya) पर क्या दान करें?
उत्तर: अन्न, जल, वस्त्र, स्वर्ण, गौ, छत्र, पंखा, खड़ाऊँ आदि का दान बहुत पुण्यकारी माना गया है।
14. सोने की खरीदारी न कर सकें तो क्या करें?
उत्तर: यदि सोना खरीदना संभव न हो, तो आप 1 रुपये का सिक्का भी श्रद्धा से खरीदकर लक्ष्मीजी को अर्पित कर सकते हैं।
15. क्या इस परंपरा का वैज्ञानिक आधार है?
उत्तर: कुछ हद तक हाँ, क्योंकि इस समय मौसम स्थिर होता है, फसलें आ चुकी होती हैं, और लोग निवेश के लिए मानसिक रूप से तैयार होते हैं।