श्री सूर्य देव की आरती:(Shri Surya Dev Ji Ki Aarti) हर सुबह सूरज की शक्ति से पाएं जीवन में नई ऊर्जा!

Soma
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श्री सूर्य देव की आरती:(Shri Surya Dev Ji Ki Aarti) हर सुबह सूरज की शक्ति से पाएं जीवन में नई ऊर्जा!

श्री सूर्य देव की आरती:(Shri Surya Dev Ji Ki Aarti) हर सुबह सूरज की शक्ति से पाएं जीवन में नई ऊर्जा!

श्री सूर्य देव की आरती (Shri Surya Dev Ji Ki Aarti) का महत्व

श्री सूर्य देव हिन्दू धर्म के प्रमुख देवताओं में से एक हैं। सूर्य देव को जीवनदाता माना जाता है, क्योंकि सूरज के बिना पृथ्वी पर जीवन संभव नहीं है। सूर्य की आरती एक खास धार्मिक क्रिया है, जिसे हर दिन सूर्योदय के समय या विशेष अवसरों पर गाया जाता है। यह आरती सूर्य देव को प्रसन्न करने और उनके आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए की जाती है। सूर्य की आरती से न सिर्फ शारीरिक बल मिलता है, बल्कि मानसिक और आत्मिक शांति भी प्राप्त होती है।

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आरती का महत्व मुख्य रूप से सूरज के तेज और शक्ति को सम्मानित करने में है। सूर्य देव का आशीर्वाद पाने के लिए लोग सूर्योदय के समय उबले हुए जल में अपनी परछाई देखकर, सूर्य की पूजा करते हैं और उनका ध्यान करते हैं। आरती के जरिए भक्त सूरज से शक्ति, स्वास्थ्य, और समृद्धि की कामना करते हैं।

श्री सूर्य देव की आरती (Shri Surya Dev Ji Ki Aarti)

श्री सूर्य देव की आरती
(Shri Surya Dev Ji Ki Aarti)


ऊँ जय सूर्य भगवान, जय हो दिनकर भगवान।
जगत् के नेत्र स्वरूपा, तुम हो त्रिगुण स्वरूपा।
धरत सब ही तव ध्यान, ऊँ जय सूर्य भगवान।।


सारथी अरूण हैं प्रभु तुम, श्वेत कमलधारी। तुम चार भुजाधारी।।
अश्व हैं सात तुम्हारे, कोटी किरण पसारे। तुम हो देव महान।। ऊँ जय सूर्य ……
ऊषाकाल में जब तुम, उदयाचल आते। सब तब दर्शन पाते।।


फैलाते उजियारा जागता तब जग सारा। करे सब तब गुणगान ।। ऊँ जय सूर्य ……
संध्या में भुवनेश्वर अस्ताचल जाते। गोधन तब घर आते।।
गोधुली बेला में हर घर हर आंगन में। हो तव महिमा गान ।। ऊँ जय सूर्य ……
देव दनुज नर नारी ऋषी मुनी वर भजते। आदित्य हृदय जपते।।


स्त्रोत ये मंगलकारी, इसकी है रचना न्यारी। दे नव जीवनदान ।। ऊँ जय सूर्य ……
तुम हो त्रिकाल रचियता, तुम जग के आधार। महिमा तब अपरम्पार।।
प्राणों का सिंचन करके भक्तों को अपने देते। बल बृद्धि और ज्ञान ।। ऊँ जय सूर्य ……
भूचर जल चर खेचर, सब के हो प्राण तुम्हीं। सब जीवों के प्राण तुम्हीं।।


वेद पुराण बखाने धर्म सभी तुम्हें माने। तुम ही सर्व शक्तिमान ।। ऊँ जय सूर्य ……
पूजन करती दिशाएं पूजे दश दिक्पाल। तुम भुवनों के प्रतिपाल।।
ऋतुएं तुम्हारी दासी, तुम शाश्वत अविनाशी। शुभकारी अंशमान ।। ऊँ जय सूर्य ……


ऊँ जय सूर्य भगवान, जय हो दिनकर भगवान।
जगत के नेत्र रूवरूपा, तुम हो त्रिगुण स्वरूपा।।
धरत सब ही तव ध्यान, ऊँ जय सूर्य भगवान।।

श्री सूर्य देव की आरती:(Shri Surya Dev Ji Ki Aarti) हर सुबह सूरज की शक्ति से पाएं जीवन में नई ऊर्जा!
श्री सूर्य देव की आरती:(Shri Surya Dev Ji Ki Aarti) हर सुबह सूरज की शक्ति से पाएं जीवन में नई ऊर्जा!

श्री सूर्य देव की आरती (Shri Surya Dev Ji Ki Aarti) के शब्द

सूर्य देव की आरती के शब्द बहुत ही प्रभावशाली और ऊर्जा से भरे होते हैं। इन शब्दों में सूरज की अनंत शक्ति का वर्णन किया गया है। ये शब्द सूरज के प्रभाव को स्वीकार करते हुए, उसे अपने जीवन में शामिल करने की बात करते हैं। आरती का उच्चारण करने से वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

सूर्य देव की आरती में इन पंक्तियों का महत्वपूर्ण स्थान है: “जय सूर्य देव, शुभ, लाभ देने वाले, तेरी कृपा से जीवन में हर खुशी और समृद्धि आवे।”

यह पंक्तियां सूर्य की कृपा से जीवन के हर पहलु में उन्नति की कामना करती हैं। इसमें सूर्य देव के अद्भुत तेज और उनके द्वारा दिए जाने वाले आशीर्वाद की महिमा का बखान किया गया है।

सूर्य देव की पूजा कैसे करें?

सूर्य देव की पूजा एक विशेष तरीका है, जिसे सही विधि से करना जरूरी है। पूजा की शुरुआत सूर्योदय से पहले की जाती है, क्योंकि सूरज उगने से पहले का समय बेहद पवित्र होता है। इस समय, व्यक्ति पानी में सूर्य देव के प्रतिबिंब को देखता है और उन्हें प्रणाम करता है। फिर लाल रंग के पुष्प और गंध से सूर्य देव की पूजा की जाती है।

सूर्य देव की पूजा में कच्चा दूध, जल, चावल, और तुलसी के पत्ते का प्रयोग किया जाता है। इसके बाद आरती का गायन किया जाता है, जिसमें सूर्य देव की महिमा का गान किया जाता है।

सूर्य देव की आरती का लाभ

श्री सूर्य देव की आरती (Shri Surya Dev Ji Ki Aarti) के कई लाभ होते हैं। सबसे महत्वपूर्ण लाभ यह है कि इससे जीवन में शक्ति और उर्जा का संचार होता है। सूर्य की आरती करने से व्यक्ति में मानसिक स्थिरता आती है और आत्मविश्वास में भी वृद्धि होती है। इसके अलावा, यह आरती शरीर को स्वस्थ और सशक्त बनाए रखने में मदद करती है।

सूर्य आरती के नियमित जाप से शारीरिक दर्द, आंखों की समस्याएं, और मानसिक तनाव को भी दूर किया जा सकता है। जो लोग सूर्य आरती का उच्चारण करते हैं, उन्हें जीवन में सफलता और समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

सूर्य देव की आरती के भावार्थ

सूर्य देव की आरती केवल शब्दों का उच्चारण नहीं है, बल्कि इसमें गहरे भावार्थ छिपे होते हैं। इन शब्दों में एक विशेष प्रकार का आध्यात्मिक संदेश होता है। सूर्य देव को आराधना करने का यह तरीका हमें अपने जीवन में सूरज की तरह चमकने और दूसरों की मदद करने की प्रेरणा देता है।

आरती में सूरज के तेज, ज्ञान और ऊर्जा का वर्णन किया जाता है। इसका उद्देश्य हमें यह समझाना है कि जैसे सूर्य सभी प्राणियों को जीवन देता है, वैसे ही हमें भी अपने आसपास के लोगों को सकारात्मक ऊर्जा देना चाहिए। इससे हमारा जीवन न केवल आनंदित होता है, बल्कि हम समाज में भी अच्छा योगदान दे सकते हैं।

सूर्य देव की आरती का समय और विधि

श्री सूर्य देव की आरती (Shri Surya Dev Ji Ki Aarti) को सूर्योदय से पहले या सूर्यास्त के समय किया जा सकता है। सुबह के समय सूर्य के उगते हुए सूरज के साथ यह आरती अत्यंत प्रभावी मानी जाती है। इस समय का वातावरण शुद्ध होता है, और सूर्य के ताप के साथ-साथ सकारात्मक ऊर्जा का भी प्रवाह बढ़ता है।

आरती के दौरान, व्यक्ति को चाहिए कि वह सूरज के सामने दीपक जलाएं और धूप अर्पित करें। इस दौरान, सूर्य देव का ध्यान करते हुए आरती का पाठ करें। आरती के पश्चात, कुछ समय ध्यान और प्रार्थना में बिताएं, ताकि आपका मन शांति और संतुलन की ओर अग्रसर हो सके।

सूर्य देव की आरती के साथ अन्य अनुष्ठान

सूर्य देव की आरती के साथ अन्य पूजा अनुष्ठान भी किए जा सकते हैं, जो अधिक प्रभावी होते हैं। जैसे कि सूर्य नमस्कार या सूर्य गायत्री मंत्र का जाप। सूर्य नमस्कार शरीर के लिए एक बेहतरीन व्यायाम है, और यह मानसिक शांति के लिए भी लाभकारी है। गायत्री मंत्र का जाप सूर्य देव की आराधना में अत्यधिक महत्वपूर्ण माना जाता है।

इन अनुष्ठानों के माध्यम से व्यक्ति अपनी आध्यात्मिक उन्नति के साथ-साथ शारीरिक स्वास्थ्य में भी सुधार कर सकता है। विशेष रूप से उन लोगों के लिए, जो मानसिक या शारीरिक परेशानियों का सामना कर रहे हैं, ये अनुष्ठान बहुत लाभकारी होते हैं।

सूर्य देव की आरती और त्यौहार

कई हिंदू त्यौहारों पर सूर्य देव की विशेष पूजा की जाती है, जैसे कि छठ पूजा, मकर संक्रांति, और नव रात्रि। इन अवसरों पर सूर्य देव की आरती और पूजा का विशेष महत्व होता है। खासकर छठ पूजा में, सूर्य देव की आराधना पूरी तरह से सूर्य की आरती और अन्य अनुष्ठानों पर केंद्रित होती है। इस दिन, भक्त सूरज की पूजा करके, अपनी इच्छाओं की पूर्ति की कामना करते हैं।

त्योहारों के दौरान सूर्य देव की आरती का गान वातावरण को पवित्र और आध्यात्मिक बना देता है, और यह समृद्धि, सुख, और शांति लाने का एक तरीका है। इस प्रकार, ये त्यौहार न सिर्फ धार्मिक होते हैं, बल्कि व्यक्ति के जीवन को एक नई दिशा भी प्रदान करते हैं।

श्री सूर्य देव की आरती (Shri Surya Dev Ji Ki Aarti) एक अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रभावशाली पूजा है, जिसे हर व्यक्ति को अपनी जीवनशैली में शामिल करना चाहिए। सूर्य देव की आरती से न केवल व्यक्ति के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार होता है, बल्कि इससे जीवन में ऊर्जा, शक्ति, और समृद्धि का संचार भी होता है। नियमित रूप से सूर्य देव की आरती करने से हम जीवन के हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त कर सकते हैं और अपनी आध्यात्मिक उन्नति की दिशा में कदम बढ़ा सकते हैं।

FAQs: श्री सूर्य देव की आरती (Shri Surya Dev Ji Ki Aarti)

1. श्री सूर्य देव की आरती (Shri Surya Dev Ji Ki Aarti) क्या है?

श्री सूर्य देव की आरती (Shri Surya Dev Ji Ki Aarti) एक धार्मिक पूजा है, जो सूर्य देव की महिमा का गान करने और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए की जाती है। इसे विशेष रूप से सूर्योदय के समय गाया जाता है।

2. सूर्य देव की पूजा क्यों की जाती है?

सूर्य देव की पूजा जीवन में शक्ति, उर्जा, समृद्धि, और स्वास्थ्य के लिए की जाती है। सूर्य को जीवन का स्रोत और ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है।

3. सूर्य देव की आरती का सही समय क्या है?

सूर्य देव की आरती सूर्योदय से पहले या सूर्यास्त के समय की जाती है। सूर्योदय के समय इसे विशेष रूप से प्रभावी माना जाता है।

4. सूर्य देव की आरती के लाभ क्या हैं?

इससे शरीर को शक्ति मिलती है, मानसिक शांति मिलती है, और समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है। यह शरीर और मन दोनों के लिए फायदेमंद है।

5. सूर्य देव की आरती का उच्चारण कैसे किया जाता है?

सूर्य देव की आरती का उच्चारण शुद्धता और भक्ति के साथ करना चाहिए। इसे सूर्योदय के समय दीपक और धूप जलाकर गाना जाता है।

6. क्या सूर्य देव की पूजा में कोई विशेष सामग्री की आवश्यकता होती है?

हां, सूर्य देव की पूजा में कच्चा दूध, जल, चावल, और तुलसी के पत्तों का प्रयोग किया जाता है।

7. क्या सूर्य देव की पूजा से शारीरिक लाभ होता है?

हां, सूर्य देव की पूजा से शरीर में ऊर्जा का संचार होता है और यह शारीरिक स्वास्थ्य को सुधारने में मदद करता है, खासकर आंखों से संबंधित समस्याओं में लाभ होता है।

8. क्या सूर्य देव की पूजा से मानसिक शांति मिलती है?

जी हां, सूर्य देव की पूजा और आरती से मानसिक शांति मिलती है। यह ध्यान केंद्रित करने और आत्मविश्वास बढ़ाने में मदद करती है।

9. क्या सूर्य देव की पूजा बच्चों के लिए भी की जा सकती है?

हां, बच्चों के लिए भी सूर्य देव की पूजा की जा सकती है। यह उन्हें शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रखने में मदद करती है।

10. क्या सूर्य देव की आरती केवल हिंदू धर्म में की जाती है?

सूर्य देव की आरती मुख्य रूप से हिंदू धर्म में की जाती है, लेकिन अन्य धर्मों में भी सूरज को सम्मान दिया जाता है और उसकी पूजा की जाती है।

11. क्या सूर्य देव की पूजा से जीवन में समृद्धि आती है?

जी हां, सूर्य देव की पूजा से जीवन में समृद्धि, सुख, और सफलता आती है। यह पूजा हमें मानसिक शक्ति और सकारात्मकता प्रदान करती है।

12. क्या सूर्य देव की आरती का कोई विशेष मंत्र है?

सूर्य देव की आरती में कोई खास मंत्र होता है, जैसे “जय सूर्य देव, शुभ लाभ देने वाले।” इसके अलावा, सूर्य गायत्री मंत्र भी प्रचलित है।

13. क्या सूर्य देव की आरती का जाप रोज़ करना चाहिए?

रोज़ सूर्य देव की आरती का जाप करने से व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और मानसिक स्थिति बेहतर रहती है।

14. क्या सूर्य देव की पूजा से ग्रह दोषों का निवारण होता है?

जी हां, सूर्य देव की पूजा से ग्रह दोषों में कमी आती है और व्यक्ति के जीवन में संतुलन और शांति स्थापित होती है।

15. क्या सूर्य देव की पूजा करने से किसी विशेष दिन की आवश्यकता होती है?

नहीं, सूर्य देव की पूजा किसी भी दिन की जा सकती है। हालांकि, विशेष दिनों जैसे मकर संक्रांति और छठ पूजा पर इसकी विशेष महिमा मानी जाती है।

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