संकष्टी गणेश चतुर्थी (Sankashti Ganesh Chaturthi) 2025: जानिए पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और चमत्कारी लाभ!
संकष्टी गणेश चतुर्थी (Sankashti Ganesh Chaturthi) 2025: पूजा विधि और लाभ
संकष्टी गणेश चतुर्थी (Sankashti Ganesh Chaturthi) का महत्व
संकष्टी गणेश चतुर्थी (Sankashti Ganesh Chaturthi) भगवान गणेश को समर्पित एक महत्वपूर्ण व्रत और पर्व है। यह चतुर्थी हर महीने की कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष में आती है, लेकिन कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है। इस दिन भगवान गणेश की विशेष पूजा-अर्चना और व्रत किया जाता है। मान्यता है कि इस व्रत को करने से संकटों का नाश होता है और सभी इच्छाएं पूरी होती हैं।
भगवान गणेश को विघ्नहर्ता, बुद्धिदाता और संकटमोचक कहा जाता है। इसलिए, इस दिन उनकी पूजा करने से सभी बाधाएं दूर होती हैं और सुख-समृद्धि प्राप्त होती है। इस व्रत को करने से विशेष रूप से धन, विद्या, बुद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति होती है।
संकष्टी गणेश चतुर्थी (Sankashti Ganesh Chaturthi) 2025 की तिथि और शुभ मुहूर्त
साल 2025 में संकष्टी गणेश चतुर्थी की तिथि और शुभ मुहूर्त इस प्रकार रहेगा:
- तारीख: 14 जनवरी 2025 (मंगलवार)
- चतुर्थी तिथि प्रारंभ: 13 जनवरी 2025, रात्रि 10:45 बजे
- चतुर्थी तिथि समाप्त: 14 जनवरी 2025, रात्रि 08:20 बजे
- पूजा का शुभ मुहूर्त: सुबह 07:00 से दोपहर 12:00 बजे तक
- चंद्रोदय का समय: रात 09:15 बजे
इस दिन चंद्र दर्शन का विशेष महत्व होता है, क्योंकि चंद्रमा को अर्घ्य देने से व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है।
संकष्टी गणेश चतुर्थी (Sankashti Ganesh Chaturthi) की पूजा विधि
पूजा विधि बहुत सरल होती है, लेकिन इसे सही तरीके से करने से भगवान गणेश की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
- स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूजा स्थल को शुद्ध करें।
- गणपति प्रतिमा या चित्र को स्थापित करें और उन्हें पुष्प, धूप, दीप और चंदन अर्पित करें।
- गणपति मंत्रों का जाप करें, जैसे – “ॐ गं गणपतये नमः”।
- मोदक, लड्डू, फल और दूर्वा घास भगवान गणेश को अर्पित करें।
- गणपति आरती करें और श्री गणेश चालीसा का पाठ करें।
- रात्रि में चंद्रमा को अर्घ्य दें और चंद्र दर्शन करें।
इस पूजा विधि से भगवान गणेश प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों को संकटों से मुक्त करते हैं।
संकष्टी गणेश चतुर्थी (Sankashti Ganesh Chaturthi) व्रत का महत्व
इस व्रत को करने से व्यक्ति के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है। विशेष रूप से, यह व्रत स्वास्थ्य, शिक्षा और करियर में उन्नति के लिए बेहद लाभकारी माना जाता है।
महाभारत और पुराणों में भी संकष्टी गणेश चतुर्थी के महत्व का वर्णन किया गया है। इस व्रत को करने से पारिवारिक समस्याएं समाप्त होती हैं और संतान प्राप्ति का योग बनता है।
संकष्टी गणेश चतुर्थी (Sankashti Ganesh Chaturthi) के लाभ
इस व्रत को करने से भक्तों को कई लाभ प्राप्त होते हैं:
- संकटों का नाश – भगवान गणेश को संकटों का नाश करने वाला देवता माना जाता है।
- सुख-समृद्धि की प्राप्ति – इस व्रत को करने से जीवन में आर्थिक उन्नति और सौभाग्य बढ़ता है।
- बुद्धि और ज्ञान का विकास – विद्यार्थी और बुद्धिजीवी वर्ग के लिए यह व्रत अत्यंत लाभकारी है।
- रोग और कष्टों से मुक्ति – इस दिन व्रत करने से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से छुटकारा मिलता है।
- परिवार में शांति और खुशहाली – पारिवारिक कलह समाप्त होती है और सौहार्दपूर्ण वातावरण बना रहता है।
संकष्टी गणेश चतुर्थी (Sankashti Ganesh Chaturthi) पर विशेष उपाय
अगर आप चाहते हैं कि भगवान गणेश की विशेष कृपा बनी रहे, तो इस दिन कुछ विशेष उपाय कर सकते हैं:
- गणेश जी को 21 दूर्वा अर्पित करें, इससे वे जल्दी प्रसन्न होते हैं।
- मोदक का भोग लगाएं, क्योंकि यह भगवान गणेश की प्रिय मिठाई है।
- “ॐ वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभः। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥” मंत्र का जाप करें।
- गरीबों को भोजन और वस्त्र दान करें, इससे भगवान गणेश की कृपा बनी रहती है।

संकष्टी गणेश चतुर्थी (Sankashti Ganesh Chaturthi) से जुड़ी पौराणिक कथा
प्राचीन काल में एक राजा की कोई संतान नहीं थी। उसने महर्षि नारद से उपाय पूछा। नारदजी ने उसे संकष्टी गणेश चतुर्थी का व्रत करने को कहा। राजा ने नियमपूर्वक व्रत किया और कुछ महीनों बाद उसे पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई।
इसी प्रकार, एक बार देवताओं और दानवों के बीच युद्ध हुआ। देवताओं ने गणेशजी से प्रार्थना की। गणेशजी ने संकष्टी चतुर्थी के प्रभाव से देवताओं को विजय दिलाई।
संकष्टी गणेश चतुर्थी 2025 एक अत्यंत शुभ और लाभकारी व्रत है। यह संकटों का नाश, सौभाग्य की प्राप्ति और जीवन में समृद्धि लाने वाला पर्व है। जो भी भक्त श्रद्धा और विश्वास से इस व्रत को करता है, उसे गणेश जी की कृपा प्राप्त होती है और उसका जीवन मंगलमय हो जाता है।
संकष्टी गणेश चतुर्थी (Sankashti Ganesh Chaturthi) 2025 से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्न और उत्तर
1. संकष्टी गणेश चतुर्थी (Sankashti Ganesh Chaturthi) क्या है?
संकष्टी गणेश चतुर्थी भगवान गणेश को समर्पित एक शुभ व्रत और पर्व है, जो हर महीने की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है।
2. संकष्टी गणेश चतुर्थी (Sankashti Ganesh Chaturthi) 2025 कब है?
साल 2025 में संकष्टी गणेश चतुर्थी 14 जनवरी 2025 (मंगलवार) को मनाई जाएगी।
3. इस व्रत का महत्व क्या है?
इस व्रत को करने से संकट दूर होते हैं, मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं, और सौभाग्य की प्राप्ति होती है।
4. संकष्टी गणेश चतुर्थी (Sankashti Ganesh Chaturthi) का शुभ मुहूर्त क्या है?
इस दिन पूजा का शुभ समय सुबह 07:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक रहेगा।
5. चंद्रमा को अर्घ्य देने का समय कब है?
रात्रि में 09:15 बजे चंद्रमा को अर्घ्य देने का समय रहेगा।
6. इस दिन कौन-से मंत्रों का जाप करें?
भगवान गणेश के निम्न मंत्रों का जाप करना लाभकारी होता है:
- “ॐ गं गणपतये नमः”
- “ॐ वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभः। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥”
7. व्रत की पूजा विधि क्या है?
- सुबह स्नान कर गणपति की मूर्ति स्थापित करें।
- धूप, दीप, फूल, चंदन, मोदक और दूर्वा चढ़ाएं।
- गणेश चालीसा और आरती करें।
- रात में चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत का समापन करें।
8. इस व्रत को कौन कर सकता है?
कोई भी स्त्री, पुरुष, विद्यार्थी और गृहस्थ व्यक्ति यह व्रत कर सकता है।
9. क्या बिना व्रत किए भी पूजा की जा सकती है?
हाँ, केवल पूजा करने से भी भगवान गणेश की कृपा प्राप्त होती है।
10. व्रत के दौरान क्या खा सकते हैं?
व्रत के दौरान फलाहार, दूध, साबूदाना, मूंगफली और मखाने का सेवन किया जा सकता है।
11. इस दिन क्या नहीं करना चाहिए?
- चंद्रमा के दर्शन वर्जित हैं (अर्घ्य देने से पहले)।
- मांसाहार और नशे से बचें।
- क्रोध और झूठ बोलने से परहेज करें।
12. इस दिन कौन-से उपाय करने चाहिए?
- भगवान गणेश को 21 दूर्वा अर्पित करें।
- गरीबों को भोजन और वस्त्र दान करें।
- गणपति के किसी मंदिर में लड्डू चढ़ाएं।
13. संकष्टी गणेश चतुर्थी का क्या लाभ है?
- सभी संकट दूर होते हैं।
- बुद्धि और स्मरण शक्ति तेज होती है।
- धन, सौभाग्य और पारिवारिक सुख बढ़ता है।
14. इस दिन कौन-सी कथा सुननी चाहिए?
इस दिन संकष्टी गणेश चतुर्थी की व्रत कथा सुननी चाहिए, जिसमें गणपति की कृपा से संकटों से मुक्ति मिलने की कहानियाँ होती हैं।
15. क्या हर महीने यह व्रत किया जा सकता है?
हाँ, यह व्रत हर महीने की कृष्ण पक्ष चतुर्थी को किया जाता है, लेकिन माघ मास की संकष्टी चतुर्थी का विशेष महत्व है।