2025 में कब है परशुराम जयंती? (Parshuram Jayanti) जानिए इसकी रहस्यमयी कथा, पूजन विधि और महान महत्व!

Soma
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2025 में कब है परशुराम जयंती (Parshuram Jayanti) जानिए इसकी रहस्यमयी कथा, पूजन विधि और महान महत्व!

2025 में कब है परशुराम जयंती? (Parshuram Jayanti) जानिए इसकी रहस्यमयी कथा, पूजन विधि और महान महत्व!


परशुराम जयंती (Parshuram Jayanti) 2025: कथा, पूजा विधि और महत्व

परशुराम जयंती (Parshuram Jayanti) क्या है?

परशुराम जयंती (Parshuram Jayanti) भगवान विष्णु के छठे अवतार परशुराम जी के जन्म दिवस के रूप में मनाई जाती है। यह पर्व वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। इसी दिन को अक्षय तृतीया भी कहा जाता है, जो अत्यंत पवित्र तिथि मानी जाती है। परशुराम जी को अजेय योद्धा, धर्म रक्षक और ब्राह्मणों के रक्षक के रूप में पूजा जाता है।

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इस दिन को हिन्दू धर्म में शौर्य, न्याय और धर्म की रक्षा के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। परशुराम जयंती पर लोग पूजा-पाठ, व्रत, और दानी कर्म करते हैं। यह दिन विशेष रूप से ब्राह्मण समुदाय और कायस्थ जाति के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है।


परशुराम जयंती (Parshuram Jayanti) 2025 में कब है?

2025 में परशुराम जयंती का पर्व 30 अप्रैल, बुधवार को मनाया जाएगा। इस दिन अक्षय तृतीया भी है, जिससे इस तिथि का धार्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है। यह दिन सूर्य और चंद्रमा दोनों के उच्चतम स्थिति में होने के कारण अत्यंत शुभ माना जाता है।

लोग इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करके व्रत रखते हैं, और भगवान परशुराम की विधिवत पूजा करते हैं। धार्मिक अनुष्ठानों, कथाओं और भजन-कीर्तन का आयोजन इस दिन आम होता है।


भगवान परशुराम की उत्पत्ति की कथा

भगवान परशुराम का जन्म महार्षि जमदग्नि और माता रेणुका के घर हुआ था। वे भृगु वंश से थे और जन्म से ही ब्राह्मण कुल में आए थे, लेकिन उन्होंने क्षत्रियों जैसे युद्ध कौशल भी सीखे थे। उनका नाम ‘राम’ था, लेकिन जब उन्होंने अपने परशु (कुल्हाड़ी) से अन्याय के खिलाफ युद्ध किया, तब उन्हें ‘परशु वाला राम’ यानी परशुराम कहा गया।

कहा जाता है कि भगवान परशुराम ने पृथ्वी पर इक्कीस बार क्षत्रियों का संहार किया था, क्योंकि उन्होंने धर्म से हटकर अन्याय और अत्याचार किए थे। उन्होंने ये कार्य धर्म की रक्षा और सत्य की स्थापना के लिए किए। उनकी कथा से हमें यह सिखने को मिलता है कि अन्याय के खिलाफ उठाया गया शस्त्र भी धर्म होता है


भगवान परशुराम के जीवन की प्रमुख घटनाएं

भगवान परशुराम के जीवन में कई अद्भुत और प्रेरणादायक घटनाएं हैं। एक घटना के अनुसार, एक बार राजा कार्तवीर्य अर्जुन ने उनके पिता से जबरन कामधेनु गाय छीन ली। इससे क्रोधित होकर परशुराम जी ने राजा का संहार कर दिया और गाय को वापस ले आए।

एक अन्य प्रसिद्ध घटना में, परशुराम जी ने अपने पिता के कहने पर अपनी मां रेणुका का वध कर दिया, फिर उनकी आज्ञा से उन्हें पुनः जीवित भी कर दिया। इस घटना से यह दिखता है कि वे अनुशासन, आज्ञा पालन और तपस्वी जीवन के प्रतीक थे।

इन कथाओं से यह सिद्ध होता है कि भगवान परशुराम न केवल योद्धा थे, बल्कि वे एक त्यागी और धर्मनिष्ठ ब्राह्मण भी थे।


भगवान परशुराम का अवतार क्यों हुआ?

भगवान विष्णु ने परशुराम के रूप में अवतार इसलिए लिया क्योंकि उस समय पृथ्वी पर क्षत्रिय राजा अन्याय और अत्याचार करने लगे थे। वे प्रजा पर अत्याचार, धर्म की उपेक्षा, और स्वार्थ के लिए युद्ध करने लगे थे। ऐसे समय में धर्म की रक्षा के लिए भगवान ने परशुराम रूप में जन्म लिया

उनका अवतरण यह संदेश देता है कि जब अन्याय और अधर्म बढ़ता है, तब ईश्वर अवतार लेकर धर्म की स्थापना करते हैं। परशुराम जी का उद्देश्य न्याय की स्थापना और ब्रह्म तेज की रक्षा था।


भगवान परशुराम का संबंध महाभारत और रामायण से

भगवान परशुराम न केवल त्रेता युग में प्रकट हुए, बल्कि वे द्वापर युग में भी जीवित रहे। रामायण में वे तब प्रकट होते हैं जब भगवान राम शिव धनुष तोड़ते हैं। परशुराम जी को यह अपमानजनक लगता है, लेकिन बाद में उन्हें समझ आता है कि राम कोई साधारण मनुष्य नहीं, बल्कि ईश्वर के अवतार हैं

महाभारत में भी वे नजर आते हैं। उन्होंने भीष्म पितामह को युद्ध की शिक्षा दी थी और कर्ण को भी अस्त्र-शस्त्रों का ज्ञान दिया। इससे यह साबित होता है कि परशुराम जी कालजयी, अविनाशी, और सनातन धर्म के योद्धा हैं।


परशुराम जयंती (Parshuram Jayanti) की पूजा विधि

परशुराम जयंती पर पूजा करने के लिए कुछ विशेष नियम और विधियाँ हैं। आइए जानते हैं इसकी संपूर्ण पूजा विधि:

  1. प्रातः काल उठकर स्नान करके शुद्ध वस्त्र पहनें।
  2. भगवान परशुराम की प्रतिमा या चित्र के सामने दीपक जलाएं
  3. उन्हें चंदन, फूल, तुलसी, सिंदूर, भोग, और धूप-दीप अर्पित करें।
  4. “ॐ परशुरामाय नमः” मंत्र का जाप करें।
  5. परशुराम जी की कथा का पाठ करें और आरती करें।
  6. दिनभर व्रत रखें और शाम को सात्विक भोजन करें।

पूजा में ध्यान, जप, और दान का विशेष महत्व होता है।


परशुराम जयंती (Parshuram Jayanti) पर क्या करना चाहिए?

इस पवित्र दिन पर कुछ विशेष कार्यों को करने से सद्गुण, धन, और शांति की प्राप्ति होती है:

  • गायों को चारा, ब्राह्मणों को दान, और जरूरतमंदों को अन्न देना चाहिए।
  • धार्मिक ग्रंथों का पाठ करना और भजन-कीर्तन करना लाभकारी होता है।
  • क्रोध, झूठ, और हिंसा से बचना चाहिए।
  • परशुराम मंत्र का जाप करें, जैसे:
    “ॐ रामभद्राय परशुरामाय नमः”

परशुराम जयंती (Parshuram Jayanti) का महत्व

परशुराम जयंती केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि यह न्याय, धैर्य, और त्याग का प्रतीक भी है। यह दिन हमें सिखाता है कि धर्म की रक्षा के लिए साहसिक कदम उठाना भी जरूरी होता है। परशुराम जी जैसे आदर्श व्यक्तित्व से हमें सच्चाई, अनुशासन और परिश्रम की प्रेरणा मिलती है।

यह पर्व हमें यह भी याद दिलाता है कि ईश्वर हर युग में धर्म की रक्षा के लिए अवतरित होते हैं। परशुराम जी के जीवन से हम सीख सकते हैं कि शस्त्र और शास्त्र दोनों का संतुलन ही वास्तविक ब्रह्म तेज होता है।


परशुराम जी को कौन मानते हैं आराध्य?

ब्राह्मण, कायस्थ, और भूमिहार जातियाँ परशुराम जी को अपना आदिगुरु और आराध्य मानती हैं। साथ ही वे भारत के उन योद्धाओं में से हैं जिनकी पूजा दक्षिण भारत में भी होती है। केरल, कर्नाटक और महाराष्ट्र में उनके कई प्राचीन मंदिर स्थित हैं।

यहां तक कि कुछ परंपराओं में परशुराम जी को देवताओं और राक्षसों के बीच संतुलन बनाने वाले देवता के रूप में भी पूजा जाता है। वे पराक्रम और संयम का संगम हैं।


परशुराम के प्रमुख मंदिर

भारत में भगवान परशुराम के कई प्रसिद्ध मंदिर हैं:

  • परशुराम मंदिर (महाराष्ट्र) – यह सबसे प्राचीन मंदिरों में से एक है।
  • रेणुका तीर्थ (हिमाचल प्रदेश) – यहां परशुराम जी की माता रेणुका देवी की पूजा होती है।
  • त्रिवेणी संगम (उत्तर प्रदेश) – यहां विशेष अनुष्ठान परशुराम जयंती पर होते हैं।
  • केरल के तटीय क्षेत्र – मान्यता है कि परशुराम जी ने समुद्र से जमीन निकालकर केरल को बसाया था।

इन मंदिरों में परशुराम जयंती पर विशेष पूजा, भजन संध्या, और प्रवचन होते हैं।


क्या परशुराम आज भी जीवित हैं?

हिंदू मान्यताओं के अनुसार, भगवान परशुराम अमर (चिरंजीवी) हैं। वे आज भी हिमालय के क्षेत्र में तपस्या कर रहे हैं और कलियुग के अंत में भगवान कल्कि को अस्त्र-शस्त्रों की शिक्षा देंगे। वे आठ चिरंजीवियों में से एक माने जाते हैं।

2025 में कब है परशुराम जयंती (Parshuram Jayanti) जानिए इसकी रहस्यमयी कथा, पूजन विधि और महान महत्व!
2025 में कब है परशुराम जयंती (Parshuram Jayanti) जानिए इसकी रहस्यमयी कथा, पूजन विधि और महान महत्व!

इस विश्वास के कारण लोग आज भी उन्हें जीवित देवता मानकर श्रद्धा और विश्वास से उनकी पूजा करते हैं। उनकी अमरता हमें यह सिखाती है कि धर्म और ज्ञान कभी समाप्त नहीं होते, वे कालजयी होते हैं।


परशुराम जयंती (Parshuram Jayanti) क्यों है हमारे लिए खास?

परशुराम जयंती हमें हमारे संस्कारों, धार्मिक मूल्यों, और धर्म की रक्षा के संकल्प की याद दिलाती है। भगवान परशुराम जैसे तेजस्वी और धर्मनिष्ठ व्यक्तित्व से हमें संयम, साहस और न्यायप्रियता की प्रेरणा मिलती है। यह दिन केवल पूजा और व्रत का नहीं, बल्कि आत्ममंथन और आत्मबल बढ़ाने का भी दिन है।

यह रहे परशुराम जयंती (Parshuram Jayanti) 2025 से जुड़े महत्वपूर्ण FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल) –


1. परशुराम जयंती (Parshuram Jayanti) कब मनाई जाएगी 2025 में?

30 अप्रैल 2025, बुधवार को मनाई जाएगी।


2. परशुराम जयंती (Parshuram Jayanti) किस तिथि को आती है?

वैशाख माह की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को आती है, जिसे अक्षय तृतीया भी कहते हैं।


3. भगवान परशुराम कौन थे?

वे भगवान विष्णु के छठे अवतार थे, जो ब्राह्मण योद्धा के रूप में जाने जाते हैं।


4. परशुराम जी का जन्म कहाँ हुआ था?

उनका जन्म महार्षि जमदग्नि और माता रेणुका के घर हुआ था।


5. भगवान परशुराम के मुख्य शस्त्र कौन से थे?

उनका प्रमुख शस्त्र परशु (कुल्हाड़ी) था, जिससे उन्होंने कई युद्ध लड़े।


6. परशुराम जयंती (Parshuram Jayanti) पर कौन-सी पूजा की जाती है?

भगवान परशुराम की विधिवत पूजा, मंत्र जाप, और कथा पाठ किया जाता है।


7. क्या परशुराम जयंती (Parshuram Jayanti) पर व्रत रखना जरूरी है?

हाँ, श्रद्धालु व्रत रखते हैं और दिनभर सात्विक आहार करते हैं।


8. क्या परशुराम जी आज भी जीवित हैं?

हां, उन्हें अमर (चिरंजीवी) माना गया है, और वे कल्कि अवतार को अस्त्र विद्या सिखाएंगे।


9. परशुराम जी ने किस राजा को मारा था?

उन्होंने कार्तवीर्य अर्जुन का वध किया था, जिन्होंने उनके पिता से कामधेनु गाय छीन ली थी।


10. परशुराम जी ने कितनी बार क्षत्रियों का संहार किया?

उन्होंने 21 बार क्षत्रियों का नाश किया था, जो अधर्मी बन गए थे।


11. परशुराम जी को किस-किसने शिक्षा दी?

उन्हें शिव जी से दिव्य अस्त्र-शस्त्रों की शिक्षा मिली थी।


12. परशुराम जयंती (Parshuram Jayanti) किन लोगों के लिए विशेष होती है?

ब्राह्मण, कायस्थ, और भूमिहार जातियाँ उन्हें अपना आराध्य मानती हैं।


13. क्या परशुराम रामायण और महाभारत में भी हैं?

हाँ, वे दोनों ग्रंथों में आते हैं। उन्होंने भीष्म और कर्ण को शिक्षा दी थी और राम से भेंट की थी।


14. परशुराम जयंती (Parshuram Jayanti) पर क्या दान देना शुभ होता है?

अनाज, वस्त्र, गाय को चारा, और ब्राह्मणों को दान देना शुभ माना जाता है।


15. परशुराम जयंती (Parshuram Jayanti) हमें क्या सिखाती है?

यह हमें धर्म की रक्षा, अन्याय के खिलाफ संघर्ष, और न्यायप्रियता की प्रेरणा देती है।


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