अशोक अष्टमी (Ashok Ashtami) 2025: जानिए शुभ मुहूर्त, महत्व और चमत्कारी पूजा विधि!
अशोक अष्टमी (Ashok Ashtami) का महत्व और पूजा विधि
अशोक अष्टमी (Ashok Ashtami)
अशोक अष्टमी (Ashok Ashtami) हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण पर्व है, जिसे चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन माता दुर्गा के विशेष रूप अशोकसुंदरी की पूजा की जाती है। यह त्योहार मुख्य रूप से दुख, शोक और संकटों को दूर करने के लिए मनाया जाता है।
अशोक अष्टमी का वर्णन कई धार्मिक ग्रंथों में मिलता है, जिसमें इसे सुख-समृद्धि और शांति का प्रतीक माना गया है। इस दिन विशेष रूप से सुख-शांति की कामना, रोगों से मुक्ति और परिवार की उन्नति के लिए पूजा-अर्चना की जाती है।
इस पर्व को ओडिशा, पश्चिम बंगाल, बिहार और उत्तर प्रदेश में बड़े उत्साह से मनाया जाता है। खासतौर पर ओडिशा के पुरी में भगवान जगन्नाथ की विशेष शोभायात्रा निकाली जाती है।
अशोक अष्टमी (Ashok Ashtami) का पौराणिक महत्व
अशोक अष्टमी से जुड़ी पौराणिक कथाओं में बताया गया है कि इस दिन माता दुर्गा ने राक्षसों का संहार कर देवताओं को मुक्त किया था। इसीलिए यह दिन शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने के लिए भी शुभ माना जाता है।
एक अन्य कथा के अनुसार, भगवान राम ने लंका पर चढ़ाई से पहले माता दुर्गा की उपासना इसी दिन की थी। उनकी कृपा से ही लंका विजय संभव हो पाई थी।
एक अन्य मान्यता के अनुसार, अशोक वृक्ष माता सीता को अत्यंत प्रिय था। जब वे रावण की अशोक वाटिका में कैद थीं, तब उन्होंने भगवान राम की याद में अशोक वृक्ष के नीचे तपस्या की थी। इसीलिए इस दिन अशोक वृक्ष की पूजा भी की जाती है।
अशोक अष्टमी (Ashok Ashtami) का ज्योतिषीय महत्व
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, अशोक अष्टमी पर ग्रहों की विशेष स्थिति व्यक्ति के जीवन में शुभता लाती है। इस दिन किए गए दान-पुण्य और पूजा-पाठ से सभी प्रकार के नकारात्मक प्रभाव समाप्त हो जाते हैं।
इस दिन चंद्रमा का प्रभाव विशेष रूप से मन की शांति और सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाने में सहायक होता है। यदि कोई व्यक्ति अपने जीवन में शोक, परेशानियों और दुखों से मुक्ति चाहता है, तो उसे अशोक अष्टमी पर व्रत और पूजा करनी चाहिए।
ज्योतिष में अशोक वृक्ष को शनि और राहु के नकारात्मक प्रभावों को समाप्त करने वाला बताया गया है। इसलिए, इस दिन अशोक के पत्तों को घर में लाना और माता दुर्गा को अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
अशोक अष्टमी (Ashok Ashtami) व्रत का महत्व
अशोक अष्टमी के दिन व्रत रखने से व्यक्ति के जीवन की सभी बाधाएँ दूर होती हैं। यह व्रत मुख्य रूप से नारी शक्ति, संतान सुख, वैवाहिक जीवन की समस्याओं को दूर करने और परिवार में शांति बनाए रखने के लिए किया जाता है।
इस दिन व्रत करने वाले व्यक्ति को निर्जला व्रत (बिना जल ग्रहण किए) या फलाहार व्रत रखना चाहिए। पूजा के बाद गरीबों और ब्राह्मणों को दान देने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।
अशोक अष्टमी (Ashok Ashtami) की पूजा विधि
अशोक अष्टमी की पूजा विधि अत्यंत सरल है। इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए और साफ वस्त्र धारण करने चाहिए। पूजा की विधि इस प्रकार है:
- माता दुर्गा की प्रतिमा या चित्र को पूजास्थल पर स्थापित करें।
- अशोक वृक्ष की शाखा घर में लाकर उसकी पूजा करें।
- माता को फूल, अक्षत, रोली, कुमकुम, चंदन आदि अर्पित करें।
- अष्टमी तिथि का विशेष मंत्र – “ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे” का 108 बार जाप करें।
- माता को अशोक के पत्ते और नारियल अर्पित करें।
- कन्या पूजन कर उन्हें भोजन कराएं और वस्त्र या दक्षिणा दें।
- दिनभर व्रत रखकर माता का ध्यान करें और संध्या के समय कथा सुनें।
अशोक वृक्ष का धार्मिक महत्व
अशोक वृक्ष को सुख-शांति और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। इसे नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने और सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाने के लिए उपयोग किया जाता है।
अशोक के पत्तों को घर के मुख्य दरवाजे पर लगाने से नकारात्मक शक्तियाँ दूर रहती हैं। इसे माता लक्ष्मी का प्रिय वृक्ष भी माना जाता है, इसलिए इसकी पूजा करने से धन-वैभव की प्राप्ति होती है।
इस दिन अशोक वृक्ष की जड़ को घर में स्थापित करने से परिवार में सुख-शांति बनी रहती है और बुरी शक्तियाँ नष्ट होती हैं।
अशोक अष्टमी (Ashok Ashtami) पर किए जाने वाले उपाय
यदि आप अपने जीवन से दुख, शोक और परेशानियों को दूर करना चाहते हैं, तो अशोक अष्टमी के दिन कुछ विशेष उपाय करें:
- अशोक के पत्तों को माता दुर्गा को अर्पित करें और उसके बाद उन्हें घर में रखें।
- गाय को गुड़ और रोटी खिलाने से आर्थिक समृद्धि बढ़ती है।
- माता दुर्गा को लाल चुनरी चढ़ाने से परिवार में खुशहाली आती है।
- अशोक वृक्ष की पूजा कर उसकी टहनी घर में रखने से वास्तु दोष समाप्त होते हैं।
- इस दिन सुहागिन महिलाओं को सिंदूर और श्रृंगार सामग्री दान करने से वैवाहिक जीवन में सुख-शांति बनी रहती है।
अशोक अष्टमी (Ashok Ashtami) की विशेषता
- यह त्योहार अशोक वृक्ष की पूजा से जुड़ा है, जो सभी प्रकार के दुखों को दूर करता है।
- इस दिन किए गए दान-पुण्य का फल कई गुना बढ़ जाता है।
- यह पर्व संतान सुख और वैवाहिक जीवन में खुशहाली लाने के लिए बहुत शुभ होता है।
- ओडिशा में भगवान जगन्नाथ की विशेष शोभायात्रा निकाली जाती है।
- इस दिन व्रत करने से ग्रह दोष शांत होते हैं और सभी प्रकार की नकारात्मक शक्तियाँ समाप्त होती हैं।
अशोक अष्टमी हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र और शुभ पर्व माना जाता है। यह त्योहार सुख, समृद्धि और नकारात्मकता को दूर करने के लिए मनाया जाता है। इस दिन माता दुर्गा और अशोक वृक्ष की पूजा करने से सभी प्रकार के दुख और परेशानियाँ समाप्त होती हैं।
अशोक अष्टमी (Ashok Ashtami) से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्न और उत्तर
1. अशोक अष्टमी (Ashok Ashtami) कब मनाई जाती है?
अशोक अष्टमी चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाती है। यह दिन माता दुर्गा की विशेष पूजा के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।
2. अशोक अष्टमी (Ashok Ashtami) का धार्मिक महत्व क्या है?
अशोक अष्टमी को सुख, शांति और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। इस दिन पूजा करने से सभी प्रकार के दुख और शोक समाप्त हो जाते हैं।
3. अशोक अष्टमी (Ashok Ashtami) का पौराणिक महत्व क्या है?
इस दिन माता दुर्गा ने राक्षसों का वध कर देवताओं को संकट से मुक्त किया था। भगवान राम ने भी लंका विजय से पहले इस दिन माता दुर्गा की आराधना की थी।
4. अशोक वृक्ष का क्या महत्व है?
अशोक वृक्ष को शोक दूर करने वाला वृक्ष माना जाता है। इसकी पूजा करने से नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है और घर में सुख-समृद्धि आती है।
5. अशोक अष्टमी (Ashok Ashtami) पर व्रत क्यों रखा जाता है?
इस दिन व्रत रखने से सभी प्रकार की परेशानियाँ और दुख समाप्त होते हैं। यह व्रत विशेष रूप से वैवाहिक जीवन और संतान सुख के लिए रखा जाता है।
6. अशोक अष्टमी पर कौन-कौन से उपाय करने चाहिए?
- अशोक के पत्ते माता दुर्गा को अर्पित करें।
- सुहागिन महिलाओं को सिंदूर और श्रृंगार सामग्री दान करें।
- गाय को रोटी और गुड़ खिलाएँ।
- अशोक वृक्ष की टहनी घर में स्थापित करें।
7. अशोक अष्टमी की पूजा विधि क्या है?
- सुबह स्नान कर माता दुर्गा और अशोक वृक्ष की पूजा करें।
- फूल, अक्षत, रोली, कुमकुम, नारियल अर्पित करें।
- माता दुर्गा के मंत्रों का जाप करें और व्रत रखें।
- कन्या पूजन कर भोजन कराएँ और दान करें।
8. अशोक अष्टमी का ज्योतिषीय महत्व क्या है?
इस दिन ग्रहों की विशेष स्थिति जीवन में सकारात्मक ऊर्जा लाती है। शनि और राहु के दुष्प्रभावों को कम करने के लिए अशोक वृक्ष की पूजा करना अत्यंत लाभकारी होता है।
9. इस दिन कौन से मंत्र का जाप करना चाहिए?
माता दुर्गा को प्रसन्न करने के लिए “ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे” मंत्र का 108 बार जाप करना चाहिए।
10. अशोक अष्टमी का पर्व सबसे अधिक कहाँ मनाया जाता है?
यह पर्व ओडिशा, पश्चिम बंगाल, बिहार और उत्तर प्रदेश में धूमधाम से मनाया जाता है। ओडिशा के पुरी में भगवान जगन्नाथ की विशेष शोभायात्रा निकाली जाती है।
11. अशोक अष्टमी पर क्या दान करना चाहिए?
इस दिन कन्याओं को भोजन कराकर वस्त्र और दक्षिणा देना शुभ माना जाता है। साथ ही गाय, ब्राह्मण और जरूरतमंदों को भोजन और दान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।
12. अशोक अष्टमी पर अशोक वृक्ष की टहनी क्यों लाते हैं?
अशोक वृक्ष की टहनी घर में रखने से सभी प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है और घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है।
13. क्या अशोक अष्टमी पर जल ग्रहण किया जा सकता है?
कुछ लोग निर्जला व्रत रखते हैं, लेकिन यदि स्वास्थ्य ठीक न हो तो फलाहार व्रत रखा जा सकता है।
14. क्या अशोक अष्टमी का व्रत महिलाएँ और पुरुष दोनों रख सकते हैं?
हाँ, यह व्रत सभी के लिए शुभ है। विशेष रूप से संतान सुख और वैवाहिक जीवन में शांति के लिए महिलाएँ इस व्रत को अधिक श्रद्धा से करती हैं।
15. अशोक अष्टमी का व्रत कब तक करना चाहिए?
यदि किसी को संतान प्राप्ति, सुख-शांति, समृद्धि और संकटों से मुक्ति की कामना है, तो वे इस व्रत को हर साल कर सकते हैं। नियमित रूप से करने पर माता दुर्गा की कृपा प्राप्त होती है। 🚩