श्री पार्वती जी की आरती:(Sri Parvati Ji Ki Aarti) माँ पार्वती की पूजा में एक महत्वपूर्ण रस्म

Soma
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श्री पार्वती जी की आरती:(Sri Parvati Ji Ki Aarti) माँ पार्वती की पूजा में एक महत्वपूर्ण रस्म

श्री पार्वती जी की आरती: (Sri Parvati Ji Ki Aarti) माँ पार्वती की पूजा में एक महत्वपूर्ण रस्म

श्री पार्वती जी की आरती (Sri Parvati Ji Ki Aarti) हिंदू धर्म में एक अत्यंत महत्वपूर्ण पूजा विधि मानी जाती है। माँ पार्वती, जिन्हें “शक्ति” और “आध्यात्मिक प्रेम” का प्रतीक माना जाता है, के प्रति श्रद्धा प्रकट करने के लिए उनकी आरती गाई जाती है। यह आरती उनकी महिमा को व्यक्त करने का एक तरीका है, जिससे भक्तों को माँ की कृपा प्राप्त होती है। इस लेख में हम श्री पार्वती जी की आरती के महत्व, इसके गायन के लाभ, और इस पूजा विधि की विभिन्न पहलुओं को विस्तार से समझेंगे।

माँ पार्वती की आरती का महत्व

माँ पार्वती का नाम शक्ति, करूणा, और अनुग्रह के रूप में लिया जाता है। वह भगवान शिव की पत्नी हैं और उनकी पूजा विशेष रूप से शक्ति के रूप में की जाती है। आरती एक प्रकार का भजन है जिसमें विशेष मंत्रों का उच्चारण किया जाता है। यह आरती माँ के प्रति हमारी श्रद्धा और आभार को व्यक्त करने का तरीका है। पार्वती जी की आरती भक्तों के जीवन में सुख, समृद्धि, और शांति लाने के लिए गाई जाती है।

आरती के दौरान, माँ पार्वती की उपस्थिति को महसूस किया जाता है और उनके आशीर्वाद से भक्तों की जीवन में कठिनाइयों का निवारण होता है। स्वास्थ्य, धन, परिवार में सुख-शांति जैसी समस्याओं को दूर करने के लिए इस आरती का विशेष महत्व है।

श्री पार्वती जी की आरती (Sri Parvati Ji Ki Aarti)

श्री पार्वती जी की आरती
(Sri Parvati Ji Ki Aarti)


जय पार्वती माता जय पार्वती माता
ब्रह्मा सनातन देवी शुभफल की दाता ।।


अरिकुलापदम विनाशिनी जय सेवक त्राता,
जगजीवन जगदंबा हरिहर गुणगाता ।।


सिंह को बाहन साजे कुण्डल हैं साथा,
देबबंधु जस गावत नृत्य करा ताथा ।।


सतयुग रूपशील अतिसुन्दर नाम सती कहलाता,
हेमाचल घर जन्मी सखियन संग राता ।।


शुम्भ निशुम्भ विदारे हेमाचल स्थाता,
सहस्त्र भुजा धरिके चक्र लियो हाथा ।।


सृष्टिरूप तुही है जननी शिव संगरंग राता,
नन्दी भृंगी बीन लही है हाथन मद माता ।।


देवन अरज करत तब चित को लाता,
गावन दे दे ताली मन में रंगराता ।।


श्री प्रताप आरती मैया की जो कोई गाता ,
सदा सुखी नित रहता सुख सम्पति पाता ।।

श्री पार्वती जी की आरती:(Sri Parvati Ji Ki Aarti) माँ पार्वती की पूजा में एक महत्वपूर्ण रस्म
श्री पार्वती जी की आरती:(Sri Parvati Ji Ki Aarti) माँ पार्वती की पूजा में एक महत्वपूर्ण रस्म!

श्री पार्वती जी की आरती (Sri Parvati Ji Ki Aarti) के शब्द

श्री पार्वती जी की आरती (Sri Parvati Ji Ki Aarti) में विशेष रूप से उन गुणों का वर्णन किया जाता है जो माँ पार्वती में निहित हैं। आरती के शब्दों में उनके दया, शक्ति, और सौम्यता का बखान किया जाता है। नीचे आरती के कुछ प्रमुख शब्द दिए गए हैं:

“जय श्री पार्वती माता, जय शिव शंकर की बहन, आपके चरणों में बसा है, दुनिया का हर सुख।”

यह आरती हमें यह बताती है कि माँ पार्वती के प्यारे चरणों में ही संपूर्ण ब्रह्मांड का सुख समाया हुआ है। उन्हें आशीर्वाद देने से जीवन की सभी समस्याएं दूर हो सकती हैं।

आरती के लाभ

माँ पार्वती की आरती गाने के कई आध्यात्मिक लाभ होते हैं। यह न केवल धार्मिक आस्था को मजबूत करती है, बल्कि जीवन में शांति, समृद्धि और मानसिक शांति भी प्रदान करती है। जब आप पार्वती जी की आरती गाते हैं, तो आप उनके साथ आध्यात्मिक जुड़ाव महसूस करते हैं, जो आपके जीवन को सकारात्मक रूप से प्रभावित करता है।

  1. मानसिक शांति: आरती के दौरान ध्यान केंद्रित करने से मानसिक शांति मिलती है।
  2. धन और समृद्धि: माँ पार्वती के आशीर्वाद से घर में धन और समृद्धि का वास होता है।
  3. समस्याओं का समाधान: आरती का गायन करने से जीवन की समस्याएं हल होती हैं।
  4. प्रेम और परिवार: पार्वती जी का आशीर्वाद परिवार में प्रेम और सौहार्द्र को बढ़ाता है।

कब और कैसे करें श्री पार्वती जी की आरती (Sri Parvati Ji Ki Aarti)

पार्वती जी की आरती (Sri Parvati Ji Ki Aarti) का पाठ विशेष रूप से सप्ताह के मंगलवार और शुक्रवार को बहुत शुभ माना जाता है। यह दिन शक्ति पूजा के लिए सबसे उपयुक्त माने जाते हैं। यदि आप आरती करना चाहते हैं, तो इसके लिए सबसे पहले पार्वती जी की प्रतिमा या चित्र के सामने दीपक और अगरबत्ती रखें। फिर, हाथ में पुष्प लेकर आरती का गायन करें।

आरती का गायन एक ध्यानपूर्ण स्थिति में करना चाहिए। ध्यान रखें कि आरती के समय पवित्रता और श्रद्धा का पालन करें। आरती के बाद, माँ की पूजा करके अपने परिवार और मित्रों के लिए आशीर्वाद प्राप्त करें।

श्री पार्वती जी की आरती (Sri Parvati Ji Ki Aarti) का प्रभाव

श्री पार्वती जी की आरती (Sri Parvati Ji Ki Aarti) का प्रभाव बहुत गहरा होता है। इसे नियमित रूप से गाने से जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं। माना जाता है कि माँ पार्वती की कृपा से व्यक्ति के समस्त कष्ट समाप्त हो जाते हैं। जो लोग मानसिक तनाव और चिंता से जूझ रहे होते हैं, उनके लिए यह आरती एक अत्यधिक प्रभावी उपचार हो सकती है।

समाज में माँ पार्वती की पूजा और आरती का महत्व

हिंदू धर्म में माँ पार्वती की पूजा परिवार के सुख और समृद्धि के लिए की जाती है। उनकी आरती गाने से घरेलू सुख-शांति बनी रहती है। इसके अलावा, माँ पार्वती की पूजा से महिलाएं भी सशक्त और सम्मानित महसूस करती हैं, क्योंकि वह शक्ति और समर्पण का प्रतीक मानी जाती हैं।

श्री पार्वती जी की आरती (Sri Parvati Ji Ki Aarti) न केवल एक धार्मिक अनुष्ठान है, बल्कि यह एक आध्यात्मिक अभ्यास भी है। यह हमे ईश्वर से जुड़ने का अवसर प्रदान करती है और हमारे जीवन को मार्गदर्शन देती है। इस आरती को गाकर हम माँ पार्वती से आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं और अपने जीवन में सुख और समृद्धि ला सकते हैं।

FAQs: श्री पार्वती जी की आरती (Sri Parvati Ji Ki Aarti) से संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्न और उत्तर

1. श्री पार्वती जी की आरती (Sri Parvati Ji Ki Aarti) क्या है?

उत्तर: श्री पार्वती जी की आरती (Sri Parvati Ji Ki Aarti) एक भजन है जो माँ पार्वती की पूजा के दौरान गाई जाती है। इसमें उनके गुणों, शक्ति और आशीर्वाद का बखान किया जाता है।

2. पार्वती जी की आरती के प्रमुख शब्द कौन से हैं?

उत्तर: आरती के कुछ प्रमुख शब्द हैं: “जय श्री पार्वती माता, जय शिव शंकर की बहन,” जो उनके शक्ति और सौम्यता का प्रतीक हैं।

3. श्री पार्वती जी की आरती (Sri Parvati Ji Ki Aarti) का महत्व क्या है?

उत्तर: यह आरती माँ पार्वती के आशीर्वाद से मानसिक शांति, धन और समृद्धि लाने के लिए गाई जाती है। यह पूजा भक्तों को जीवन में सुख और संतुलन प्रदान करती है।

4. श्री पार्वती जी की आरती (Sri Parvati Ji Ki Aarti) कब और क्यों गानी चाहिए?

उत्तर: पार्वती जी की आरती विशेष रूप से मंगलवार और शुक्रवार को गाई जाती है। यह दिन शक्ति पूजा के लिए सर्वोत्तम माने जाते हैं।

5. आरती का गायन कैसे करें?

उत्तर: आरती के गायन से पहले पार्वती जी की प्रतिमा के सामने दीपक और अगरबत्ती रखें। फिर, श्रद्धा से आरती का उच्चारण करें और ध्यान केंद्रित रखें।

6. श्री पार्वती जी की आरती (Sri Parvati Ji Ki Aarti) का प्रभाव क्या है?

उत्तर: यह आरती मानसिक शांति, सुख और समृद्धि लाने में मदद करती है। साथ ही जीवन की समस्याओं का समाधान भी करती है।

7. पार्वती जी की पूजा में कौन सी सामग्री की आवश्यकता होती है?

उत्तर: पार्वती जी की पूजा के लिए पुष्प, दीपक, अगरबत्ती, चंदन, और ताजे फल की आवश्यकता होती है।

8. क्या पार्वती जी की आरती बच्चों के लिए भी गाई जा सकती है?

उत्तर: हां, बच्चों के लिए भी श्री पार्वती जी की आरती गाई जा सकती है। यह उन्हें शांति और सद्भाव के साथ-साथ परिवार में सुख प्रदान करती है।

9. क्या आरती गाने से धन की प्राप्ति होती है?

उत्तर: हां, माना जाता है कि श्री पार्वती जी की आरती गाने से घर में धन और समृद्धि का वास होता है और आर्थिक समस्याएं दूर होती हैं।

10. क्या आरती गाने से मानसिक तनाव कम हो सकता है?

उत्तर: हां, आरती का गायन मानसिक शांति और संतुलन लाने में मदद करता है, जिससे तनाव और चिंता कम हो सकती है।

11. क्या आरती गाने से परिवार में सुख शांति आती है?

उत्तर: हां, माँ पार्वती के आशीर्वाद से परिवार में प्रेम, सौहार्द्र और शांति का वातावरण बनता है।

12. क्या पार्वती जी की आरती अन्य देवी-देवताओं की आरती से अलग है?

उत्तर: हां, पार्वती जी की आरती विशेष रूप से उनकी शक्ति और कृपा का गुणगान करती है, जबकि अन्य देवी-देवताओं की आरतियाँ उनके विशेष गुणों को व्यक्त करती हैं।

13. श्री पार्वती जी की आरती (Sri Parvati Ji Ki Aarti) के गाने से स्वास्थ्य पर क्या प्रभाव पड़ता है?

उत्तर: आरती गाने से मानसिक शांति प्राप्त होती है, जो प्रत्यक्ष रूप से शारीरिक स्वास्थ्य को भी लाभ पहुंचाती है।

14. क्या पार्वती जी की पूजा घर में करना चाहिए?

उत्तर: हां, पार्वती जी की पूजा घर में भी की जा सकती है। यह घर में सुख-शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है।

15. श्री पार्वती जी की आरती (Sri Parvati Ji Ki Aarti) का समय क्या होता है?

उत्तर: पार्वती जी की आरती को विशेष रूप से संध्या समय में गाया जाता है, लेकिन इसे किसी भी समय गाया जा सकता है जब श्रद्धा और शांति से पूजा की जाए।

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