शिव रक्षा स्तोत्र (Shiv Raksha Stotra): हर संकट से रक्षा का दिव्य कवच

Soma
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"शिव रक्षा स्तोत्र: हर संकट से रक्षा का दिव्य कवच"

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शिव रक्षा स्तोत्र (Shiv Raksha Stotra): हर संकट से रक्षा का दिव्य कवच

शिव रक्षा स्तोत्र (Shiv Raksha Stotra) क्या है?

शिव रक्षा स्तोत्र (Shiv Raksha Stotra) भगवान शिव की स्तुति में लिखा गया एक अद्भुत और शक्तिशाली पाठ है। इसे पढ़ने से व्यक्ति को भय, दुख, रोग और संकट से मुक्ति मिलती है। शिव रक्षा स्तोत्र (Shiv Raksha Stotra) भगवान शिव के प्रति भक्त की अखंड श्रद्धा और विश्वास को दर्शाता है। यह स्तोत्र विशेष रूप से उन लोगों के लिए है जो जीवन में शांति, सुरक्षा और सकारात्मक ऊर्जा चाहते हैं।

इसका रचना रावण के वंशज पुंडरीक ऋषि ने की थी। ऐसा माना जाता है कि इस स्तोत्र के पाठ से भगवान शिव स्वयं अपने भक्त की रक्षा करते हैं। शिव का नाम ही इतना शक्तिशाली है कि यह हर बुरी शक्ति को नष्ट कर देता है।


शिव रक्षा स्तोत्र (Shiv Raksha Stotra)का महत्त्व

शिव रक्षा स्तोत्र (Shiv Raksha Stotra) को पढ़ने का सबसे बड़ा लाभ यह है कि यह मानसिक शांति, आध्यात्मिक ऊर्जा और दुखों से मुक्ति प्रदान करता है। जो लोग इसे नियमित रूप से पढ़ते हैं, उन्हें जीवन में आने वाली हर प्रकार की नकारात्मकता और बाधाओं से छुटकारा मिलता है।

यह स्तोत्र न केवल हमें बाहरी खतरों से बचाता है, बल्कि हमारे मन और आत्मा को भी मजबूत बनाता है। शिव रक्षा स्तोत्र (Shiv Raksha Stotra)को पढ़ते समय भगवान शिव की ध्यान मुद्रा में ध्यान करना आवश्यक है। यह संकट निवारण और आत्मिक शुद्धि का मार्ग है।

शिव रक्षा स्तोत्र (Shiv Raksha Stotra):

शिव रक्षा स्तोत्र (Shiv Raksha Stotra)

विनियोग-ॐ अस्य श्री शिवरक्षास्तोत्रमंत्रस्य याज्ञवल्क्यऋषिः,
श्री सदाशिवो देवता, अनुष्टुपछन्दः श्री सदाशिवप्रीत्यर्थं शिव रक्षा स्तोत्रजपे विनियोगः।

चरितम् देवदेवस्य महादेवस्य पावनम् ।
अपारम् परमोदारम् चतुर्वर्गस्य साधनम् ।1।

गौरी विनायाकोपेतम् पंचवक्त्रं त्रिनेत्रकम् ।
शिवम् ध्यात्वा दशभुजम् शिवरक्षां पठेन्नरः।2।

गंगाधरः शिरः पातु भालमर्धेन्दु शेखरः।
नयने मदनध्वंसी कर्णौ सर्पविभूषणः ।3।

घ्राणं पातु पुरारातिर्मुखं पातु जगत्पतिः ।
जिह्वां वागीश्वरः पातु कन्धरां शितिकन्धरः ।4।

श्रीकण्ठः पातु मे कण्ठं स्कन्धौ विश्वधुरन्धरः ।
भुजौ भूभार संहर्ता करौ पातु पिनाकधृक् ।5।

हृदयं शङ्करः पातु जठरं गिरिजापतिः।
नाभिं मृत्युञ्जयः पातु कटी व्याघ्रजिनाम्बरः ।6।

सक्थिनी पातु दीनार्तशरणागत वत्सलः।
उरु महेश्वरः पातु जानुनी जगदीश्वरः ।7।

जङ्घे पातु जगत्कर्ता गुल्फौ पातु गणाधिपः ।
चरणौ करुणासिन्धुः सर्वाङ्गानि सदाशिवः ।8।

एताम् शिवबलोपेताम् रक्षां यः सुकृती पठेत्।
स भुक्त्वा सकलान् कामान् शिवसायुज्यमाप्नुयात्।9।

गृहभूत पिशाचाश्चाद्यास्त्रैलोक्ये विचरन्ति ये।
दूराद् आशु पलायन्ते शिवनामाभिरक्षणात्।10।

अभयम् कर नामेदं कवचं पार्वतीपतेः ।
भक्त्या बिभर्ति यः कण्ठे तस्य वश्यं जगत्त्रयम् ।11।

इमां नारायणः स्वप्ने शिवरक्षां यथाऽदिशत् ।
प्रातरुत्थाय योगीन्द्रो याज्ञवल्क्यस्तथाऽलिखत् ।12।

।इति श्री शिवरक्षास्तोत्रं सम्पूर्णम।

"शिव रक्षा स्तोत्र: हर संकट से रक्षा का दिव्य कवच"
शिव रक्षा स्तोत्र (Shiv Raksha Stotra): हर संकट से रक्षा का दिव्य कवच!

शिव रक्षा स्तोत्र (Shiv Raksha Stotra) की संरचना

शिव रक्षा स्तोत्र (Shiv Raksha Stotra) में भगवान शिव की महिमा, उनकी शक्तियों और उनके द्वारा की जाने वाली भक्तों की रक्षा का वर्णन है। इसमें संस्कृत श्लोक हैं, जो सरल और प्रभावशाली हैं। यह स्तोत्र भगवान शिव के अलग-अलग रूपों का आह्वान करता है, जैसे कि महादेव, शंकर, नीलकंठ और भोलेनाथ

स्त्रोत की प्रत्येक पंक्ति भक्त को भगवान शिव की शक्ति और कृपा का अहसास कराती है। जब इसे सच्चे मन और श्रद्धा से पढ़ा जाता है, तो यह व्यक्ति को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर देता है।


शिव रक्षा स्तोत्र (Shiv Raksha Stotra) का पाठ कब और कैसे करें?

सुबह ब्रह्म मुहूर्त में शिव रक्षा स्तोत्र (Shiv Raksha Stotra) का पाठ करना सबसे शुभ माना जाता है। इसे पढ़ने से पहले स्नान कर लें और भगवान शिव के शिवलिंग के सामने दीपक जलाएं। शांत मन से शिव रक्षा स्तोत्र (Shiv Raksha Stotra) के श्लोक पढ़ें और भगवान शिव का ध्यान करें।

आप इसे किसी भी दिन पढ़ सकते हैं, लेकिन सोमवार और श्रावण मास में इसका विशेष फल मिलता है। नियमित रूप से शिव रक्षा स्तोत्र (Shiv Raksha Stotra) पढ़ने से व्यक्ति को धन, स्वास्थ्य और मन की शांति प्राप्त होती है।


शिव रक्षा स्तोत्र (Shiv Raksha Stotra) और इसकी शक्ति

शिव रक्षा स्तोत्र (Shiv Raksha Stotra) में भगवान शिव की शक्ति का गुणगान किया गया है। इसके पाठ से व्यक्ति को शत्रुओं से मुक्ति, संकटों से छुटकारा और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा मिलती है। यह स्तोत्र भगवान शिव के अनंत रूपों का वर्णन करता है, जो त्रिदेवों में सर्वश्रेष्ठ हैं।

यह स्तोत्र न केवल हमें दुश्मनों से बचाता है, बल्कि हमें आत्मिक ज्ञान और आध्यात्मिक बल भी प्रदान करता है। शिव रक्षा स्तोत्र (Shiv Raksha Stotra) का प्रभाव इतना शक्तिशाली है कि इसे पढ़ने वाले व्यक्ति के जीवन से हर प्रकार की नकारात्मकता दूर हो जाती है।


शिव रक्षा स्तोत्र (Shiv Raksha Stotra) के लाभ

  1. सुरक्षा कवच: यह स्तोत्र एक दिव्य कवच की तरह काम करता है, जो भक्त को हर प्रकार की बाधाओं से बचाता है।
  2. शत्रुओं से रक्षा: शिव रक्षा स्तोत्र (Shiv Raksha Stotra) के पाठ से शत्रु नष्ट हो जाते हैं और उनकी बुरी इच्छाएं निष्फल हो जाती हैं।
  3. मानसिक शांति: इसे पढ़ने से मन को शांति और स्थिरता मिलती है।
  4. रोगों से मुक्ति: शिव रक्षा स्तोत्र (Shiv Raksha Stotra) के पाठ से शरीर और मन के रोग दूर होते हैं।
  5. धन और समृद्धि: शिव की कृपा से व्यक्ति को धन, ऐश्वर्य और समृद्धि प्राप्त होती है।
  6. आध्यात्मिक जागरूकता: यह स्तोत्र व्यक्ति के भीतर आध्यात्मिक ऊर्जा को बढ़ाता है।

शिव रक्षा स्तोत्र (Shiv Raksha Stotra) का महत्व आध्यात्मिक साधना में

शिव रक्षा स्तोत्र (Shiv Raksha Stotra) सिर्फ एक पाठ नहीं है, यह आध्यात्मिक साधना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसे पढ़ते समय भगवान शिव का ध्यान, उनके गुणों का गुणगान और उनकी कृपा का अनुभव किया जाता है।

इस स्तोत्र के नियमित पाठ से व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह भगवान शिव के प्रति हमारी भक्ति और श्रद्धा को और गहरा करता है।


शिव रक्षा स्तोत्र (Shiv Raksha Stotra) और सकारात्मक ऊर्जा

शिव रक्षा स्तोत्र (Shiv Raksha Stotra) के माध्यम से हम भगवान शिव की सकारात्मक ऊर्जा और शक्ति को अपने जीवन में आमंत्रित करते हैं। यह स्तोत्र व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने की क्षमता रखता है।

भगवान शिव की कृपा से असम्भव कार्य भी सम्भव हो जाते हैं। शिव रक्षा स्तोत्र (Shiv Raksha Stotra) का पाठ हमें धैर्य, आत्मविश्वास और मानसिक बल प्रदान करता है।


शिव रक्षा स्तोत्र (Shiv Raksha Stotra) और मोक्ष की प्राप्ति

हिंदू धर्म में मोक्ष को अंतिम लक्ष्य माना गया है। शिव रक्षा स्तोत्र (Shiv Raksha Stotra) का पाठ करने से व्यक्ति को पुनर्जन्म के चक्र से मुक्ति मिलती है। यह भगवान शिव की कृपा से संभव होता है।

शिव रक्षा स्तोत्र (Shiv Raksha Stotra) के माध्यम से व्यक्ति अपने पापों का प्रायश्चित कर सकता है और एक शुद्ध और पवित्र जीवन जी सकता है। भगवान शिव को महामृत्युञ्जय भी कहा जाता है, जो मृत्यु और जीवन के बीच के बंधनों को तोड़ सकते हैं।


शिव रक्षा स्तोत्र (Shiv Raksha Stotra) कैसे याद करें?

शिव रक्षा स्तोत्र (Shiv Raksha Stotra) को याद करना बहुत आसान है। इसे याद करने के लिए रोजाना इसका अभ्यास करें। हर दिन दो या तीन श्लोक याद करें और धीरे-धीरे पूरे स्तोत्र को कंठस्थ कर लें।

इसके लिए आप ऑडियो रिकॉर्डिंग या वीडियो गाइड का सहारा ले सकते हैं। इसे शुद्ध उच्चारण के साथ पढ़ना चाहिए ताकि इसका पूर्ण प्रभाव मिले।


शिव रक्षा स्तोत्र (Shiv Raksha Stotra) और शिव मंत्र का महत्व

शिव रक्षा स्तोत्र (Shiv Raksha Stotra) के साथ-साथ भगवान शिव के मंत्र भी बहुत प्रभावशाली होते हैं।

  • ॐ नमः शिवाय: यह सबसे शक्तिशाली मंत्र है जो भगवान शिव को प्रसन्न करता है।
  • महामृत्युञ्जय मंत्र: यह मंत्र व्यक्ति को मृत्यु और रोगों से बचाता है।
    शिव रक्षा स्तोत्र (Shiv Raksha Stotra) और शिव मंत्र का संयुक्त पाठ भक्त के जीवन में आध्यात्मिक उन्नति लाता है।

शिव रक्षा स्तोत्र (Shiv Raksha Stotra): भक्तों के अनुभव

अनेक भक्तों ने यह अनुभव किया है कि शिव रक्षा स्तोत्र (Shiv Raksha Stotra) पढ़ने से उनके जीवन में चमत्कारी बदलाव हुए हैं। किसी ने अपने रोग से मुक्ति पाई, तो किसी ने अपने जीवन की समस्याओं का समाधान पाया।

भगवान शिव की कृपा से उनके जीवन में शांति, संतोष और समृद्धि आई। शिव रक्षा स्तोत्र (Shiv Raksha Stotra) के पाठ से भक्तों को आत्मिक बल और सकारात्मकता मिली।


शिव रक्षा स्तोत्र (Shiv Raksha Stotra) भगवान शिव की कृपा और शक्ति को महसूस करने का एक अद्भुत माध्यम है। इसका नियमित पाठ व्यक्ति को संकटों से बचाता, मन को शांत करता और आध्यात्मिक ऊर्जा से भर देता है। भगवान शिव की भक्ति और श्रद्धा से हर असम्भव कार्य सम्भव हो सकता है।

शिव रक्षा स्तोत्र (Shiv Raksha Stotra) से जुड़े महत्वपूर्ण FAQs


1. शिव रक्षा स्तोत्र क्या है?

शिव रक्षा स्तोत्र भगवान शिव की स्तुति और उनकी कृपा प्राप्ति के लिए एक शक्तिशाली स्तोत्र है। इसे पढ़ने से व्यक्ति को संकटों, शत्रुओं और बुरी शक्तियों से सुरक्षा मिलती है।


2. शिव रक्षा स्तोत्र का पाठ कब करना चाहिए?

इसका पाठ सुबह ब्रह्म मुहूर्त में सबसे उत्तम माना जाता है। आप इसे सोमवार, महाशिवरात्रि, या श्रावण मास के दौरान पढ़ें तो विशेष लाभ मिलता है।


3. शिव रक्षा स्तोत्र का पाठ कैसे करें?

पाठ करने से पहले स्नान कर शुद्ध हो जाएं। भगवान शिव के शिवलिंग के सामने दीपक जलाकर शांत मन से इसे पढ़ें। इसे सच्ची श्रद्धा और ध्यान से पढ़ना चाहिए।


4. क्या शिव रक्षा स्तोत्र घर पर पढ़ा जा सकता है?

हाँ, इसे घर पर पढ़ना पूरी तरह से शुभ है। अगर शिवलिंग हो, तो उसके सामने पाठ करें। अन्यथा भगवान शिव की मूर्ति या चित्र के सामने भी पाठ कर सकते हैं।


5. क्या शिव रक्षा स्तोत्र को याद करना कठिन है?

नहीं, इसे याद करना आसान है। इसे नियमित अभ्यास से कुछ दिनों में कंठस्थ किया जा सकता है। आप शुरुआत में इसके श्लोकों को धीरे-धीरे याद करें।


6. क्या शिव रक्षा स्तोत्र का पाठ बिना संस्कृत ज्ञान के किया जा सकता है?

हाँ, आप इसे पढ़ सकते हैं। शुद्ध उच्चारण का ध्यान रखें। आप इसका हिंदी अनुवाद पढ़कर भी भगवान शिव की कृपा प्राप्त कर सकते हैं।


7. शिव रक्षा स्तोत्र पढ़ने के क्या फायदे हैं?

  • संकटों से सुरक्षा।
  • मानसिक शांति।
  • शत्रुओं से मुक्ति।
  • आध्यात्मिक जागरूकता।
  • रोगों और दुखों से मुक्ति।
  • जीवन में धन और समृद्धि का आशीर्वाद।

8. क्या शिव रक्षा स्तोत्र का पाठ रात में कर सकते हैं?

हाँ, लेकिन सुबह इसका पाठ करना अधिक शुभ माना गया है। रात में पाठ करते समय शांत स्थान पर भगवान शिव का ध्यान करें।


9. क्या महिलाएं शिव रक्षा स्तोत्र पढ़ सकती हैं?

जी हाँ, महिलाएं भी इसे पढ़ सकती हैं। भगवान शिव की कृपा हर भक्त को समान रूप से प्राप्त होती है।


10. क्या शिव रक्षा स्तोत्र सभी धर्मों के लोग पढ़ सकते हैं?

यह स्तोत्र भगवान शिव के प्रति श्रद्धा को व्यक्त करता है। यदि आप भगवान शिव में विश्वास रखते हैं, तो आप इसे पढ़ सकते हैं।


11. क्या शिव रक्षा स्तोत्र के साथ कोई अन्य मंत्र पढ़ा जा सकता है?

हाँ, आप ॐ नमः शिवाय या महामृत्युञ्जय मंत्र का पाठ शिव रक्षा स्तोत्र के साथ कर सकते हैं। यह आपके पाठ को और प्रभावशाली बनाता है।


12. क्या शिव रक्षा स्तोत्र पाठ से मोक्ष प्राप्त हो सकता है?

शिव रक्षा स्तोत्र भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने का एक साधन है। इसे श्रद्धा से पढ़ने पर व्यक्ति को मोक्ष और आत्मिक शांति प्राप्त हो सकती है।


13. क्या शिव रक्षा स्तोत्र का पाठ किसी विशेष परिस्थिति में करना चाहिए?

अगर आप किसी संकट, भय, या रोग से जूझ रहे हैं, तो शिव रक्षा स्तोत्र का पाठ करना विशेष लाभकारी होता है।


14. क्या शिव रक्षा स्तोत्र का पाठ हर दिन करना जरूरी है?

हर दिन पाठ करना शुभ होता है। लेकिन अगर संभव न हो, तो सोमवार और शिवरात्रि के दिन इसका पाठ अवश्य करें।


15. क्या शिव रक्षा स्तोत्र पढ़ने से जीवन में चमत्कार हो सकता है?

भगवान शिव की कृपा से जीवन में असम्भव कार्य भी सम्भव हो सकते हैं। शिव रक्षा स्तोत्र का पाठ जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और चमत्कारी बदलाव ला सकता है।


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